
नई दिल्ली: आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका पर सुनवाई अब 3 दिसम्बर को होगी। मामले की आगामी सुनवाई में दिल्ली उच्च न्यायालय इस याचिका पर फैसला लेगा कि यह जनहित याचिका सुनने योग्य है या नहीं। न्यायमूर्ति बी.डी. अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की खंडपीठ के समक्ष वीरभद्र सिंह की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए।
सुनवाई के दौरान उन्होंने दलील दी कि उस अर्जी पर सुनवाई की जाए, जिसमें कहा गया है कि यह जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि अदालत पूर्व में दिए गए उस आदेश को वापस ले जिसमें कहा गया था कि जनहित याचिका सुनवाई योग्य है। इस दौरान कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने खंडपीठ को बताया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इसी से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। दोनों वकीलों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि वह अपने उस आदेश को वापस ले लेंगे, जिसमें इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया गया था।
वीरभद्र सिंह की तरफ से दायर उस अर्जी पर 3 दिसम्बर को सुनवाई की जाएगी। पिछली सुनवाई पर वीरभद्र सिंह की तरफ से कहा गया था कि जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने एक अर्जी दायर कर सी.बी.आई. व आयकर विभाग की स्टेटस रिपोर्ट को चुनौती दी है। साथ ही अदालत के उन आदेशों पर फिर से विचार करने की मांग की है जिसमें इस जनहित याचिका को सुनवाई योग्य बताया गया है।
हालांकि कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा था कि उनको यह देखने के लिए समय चाहिए कि क्या सी.बी.आई. व आयकर विभाग वीरभद्र सिंह पर लगे आरोपों की ठीक से जांच कर रहे हैं या नहीं? क्या इस मामले में अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं? क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं? इस मामले में न्यायालय में एक एन.जी.ओ. कॉमल कॉज की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आरोप है कि यू.पी.ए. में बतौर केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान वीरभद्र सिंह ने आय से अधिक संपत्ति एकत्रित की थी। साथ ही इस याचिका में सिंह पर कई भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
