अब डरा रहा भूख, प्यास और अंधेरा

उत्तरकाशी। गंगोत्री में फंसे ढाई हजार तीर्थयात्रियों को अब भूख प्यास तथा अंधेरा डरा रहा है। सड़क और संचार सेवा ठप होने से फेफड़े, जलजनित तथा रक्तचाप सहित कई बीमारियों से परेशान तीर्थयात्रियों को अब घर की चिंता सताने लगी है। पुलिस चौकी में यात्रियों को निकालने के लिए हेलीकाप्टर भिजवाने की सूचना पर दो दिनों से परेशान यात्री दिन भर अस्थायी हेलीपैड पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन सैर सपाटे वाले अंदाज में कुछ हेलीकाप्टर आकाश में ही मंडरा कर ऊपर से ही ओझल हो रहे हैं।
गंगोत्री में आठ दिनों से न बिजली है और न पानी। रुद्रगैरा तथा केदारगंगा पर 150 तथा 25 किलोवाट की दोनों परियोजनाएं बंद हैं। लोगों का गैस, डीजल और मिट्टीतेल का कोटा खत्म होने से न चूल्हा जल रहा है और न ही रोशनी के लिए जनरेटर चल पा रहे हैं। 17 जून को भैरोंझाप नाले में मलबा आने से होटलों में ठहरे यात्रियों ने श्रीकृष्णाश्रम, गुजराती आश्रम तथा दंडी क्षेत्र आदि आश्रमों में शरण ली हुई है। अब आश्रम के गोदाम में राशन खत्म होने लगा है। भारत संचार निगम के कर्मचारी तो डीजल खत्म होने से 10 दिन पहले ही गंगोत्री छोड़कर जा चुके थे। प्राइवेट कंपनियों के मोबाइल फोन टावर भी बिना डीजल के बंद पड़े हैं। प्रशासन की ओर से अब तक गंगोत्री में फंसे लोगों की सुध नहीं ली गई है।

पानी छानकर पीने को मजबूर
उत्तरकाशी। अपने छह लोगों के ग्रुप के साथ पूना शहर से आए प्रकाश पाटिल तथा डा.एसजी.गुप्ते का कहना है कि उन्हें गंगोत्री में आठ दिन हो गए हैं। भागीरथी का पानी बेहद मटमैला है और नलों में पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में लोग भागीरथी के पानी को छानकर पीने को मजबूर हैं।

गंगोत्री में मरणासन्न हैं मरीज
उत्तरकाशी। राजकीय एलोपैथिक अस्पताल गंगोत्री के डा.महेश जोशी ने बताया कि उनके पास औसतन रोजाना 60 मरीज आ रहे हैं। आंध्रप्रदेश से आई यात्री शारदा के फेफेड़ों में पानी भर गया है। उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। कई अन्य रोगी भी श्वांस तथा जलजनित बीमारियों के आ रहे हैं। उनका इलाज चल रहा है।

पहुंचा रहे हैं गंगोत्री राशन
उत्तरकाशी। स्वामी राजाराम ने बृहस्पतिवार गंगोत्री में रसद संकट को लेकर डीएम डा.आर.राजेश कुमार को अवगत कराया कि डीएम ने पूर्ति विभाग को झाला गोदाम से गंगोत्री राशन पहुंचाने का भरोसा दिलाया। लेकिन वे हेलीकाप्टर से मदद पहुंचाने पर कुछ नहीं कह पाए।

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