अब कैसे परें रावी नदी को पार

चंबा। जिला मुख्यालय के साथ लगती तीन पंचायतों के ग्रामीण रावी को पार करने के एक मात्र साधन घरूरू के खराब होने से कालापानी जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हो गए हैं। भड़ियांकोठी, कुपाहड़ा व कोलका के ग्रामीणों व यहां के स्कूली बच्चों को घरूरू से ही रावी पार करनी पड़ती है। आज तक सरकार व प्रशासन इन गांवों को पुल के साथ जोड़ने की योजना नहीं बना पाए हैं। अब हालत यह है कि एकमात्र घरूरू को समय पर ठीक नहीं करवाया गया है। सोमवार की घटना के बाद प्रशासन ने खराब घरूरू का इस्तेमाल करने पर रोक तो लगा दी गई है, लेकिन प्रशासन की ओर से यहां के करीब 50 स्कूली बच्चों व सैकड़ों ग्रामीणों को उफनती रावी नदी को पार करने का दूसरा साधन नहीं मुहैया करवाया गया है। इससे ग्रामीणों में रोष बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन व सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। हैरानी की बात है कि यहां के स्कूली बच्चे भी पढ़ाई छोड़ कर घर बैठने को मजबूर हो गए हैं। कुछ बच्चों के तो पेपर चल हुए हैं, ऐसे में इनके अभिभावकों के लिए इन्हें रावी पार करवाकर स्कूल भेजना मुसीबत बन गया है। स्थानीय निवासी ओमकार सिंह, रूमाल सिंह, महिंद्र सिंह, दिलीप ने बताया कि आज तक प्रदेश की सरकारों से इन पंचायतों को कोरे आश्वासन ही मिलते आए हैं। घरूरू खराब होने से स्कूली बच्चों का भविष्य तो दाव पर लगा ही है और साथ ही बीमार ग्रामीणों को अस्पताल पहुंचाना के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी। अब तो एकमात्र घरूरू भी दम तोड़ चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द उनके लिए रावी पार करने का साधन मुहैया करवाए नहीं तो ग्रामीण सड़कों पर उतर आएंगे। जिला परिषद सदस्य राज सिंह ठाकुर और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव पवन नैयर ने जिला प्रशासन से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है।

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