
मुंबई: रिजर्व बैंक ने आज कहा कि गिरते रुपए की वजह से औसत से बेहतर मानसून का मुद्रास्फीति पर पडऩे वाला अनुकूल असर जाता रहेगा। चालू वित्त वर्ष की शुरूआत से अब तक डालर के मुकाबले रुपया 20 प्रतिशत तक नीचे आ गया। आज यह 65.56 रुपए प्रति डालर के नए सर्वकालिक निम्न स्तर को छू गया। रुपए की गिरावट से दम तोड़ रही अर्थव्यवस्था का पहला हमला आज आम आदमी पर होता दिख रहा है। देश के बड़े बैंक एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंकों ने कर्ज पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। हिलाजा एक्सिस बैंक पहले ही इन दरों में बढ़ोतरी कर चुका है। अब इस बढ़ोतरी के पश्चात आपके घर की ईएमआई में इजाफा तय हो गया है। बैंकों ने एक चौथाई यानी 0.25 फीसदी ब्याज दर बढ़ाने का ऐलान किया है इसके बाद आपकी ईएमआई में कुछ इस तरह बढ़ोतरी होगी।
आपने बीस साल के लिए 20 लाख रुपए का लोन लिया है और मौजूदा ब्याज दर अगर 10.5 फीसदी है तो हर महीने आप 19968 रुपए ईएमआई देते हैं, लेकिन ब्याज दर 0.25 बढऩे के बाद आपकी ईएमआई 20305 रुपए हो जाएगी यानी 337 रुपए का इजाफा। इसी तरह बीस साल के लिए 30 लाख रुपए के लोन पर मौजूदा ब्याज दर अगर 10.5 फीसदी है तो मौजूदा ईएमआई 29951 रुपये है। ब्याज दर 0.25 बढऩे के बाद ईएमआई 30457 रुपये हो जाएगी यानी 506 रुपये का इजाफा, लेकिन राहत की बात ये है कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी से फिलहाल इनकार किया है।
आईसीआईसीआई बैंक ने बयान में कहा कि बैंक ने इसी प्रकार की बढ़ोतरी प्रधान उधारी दर में की है। नई दर मौजूदा ग्राहकों पर लागू होगी, जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लिया है। वहीं बैंक ने यह भी कलियर कर दिया है कि फिक्स ब्याज दरों पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए दरें यथावत रहेंगी।
इससे पहले, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक तथा यस बैंक ने ब्याज दरें 0.2 से 0.25 प्रतिशत बढ़ाई हैं। पब्लिक सेक्टर के बैंकों में अब तक केवल आंध्रा बैंक ने बेस रेट में बढो़तरी की है। एचडीएफसी ने अपने बेंचमार्क बेस रेट में 0.25 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है। इससे ग्राहकों के लिए होम लोन महंगा हो जाएगा।
रिजर्व बैंक की आज जारी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘हालांकि, प्रमुख मुद्रास्फीति पहली तिमाही में नरम पड़कर औसतन 4.7 प्रतिशत पर आ गई, लेकिन मुद्रास्फीति के मोर्चे पर अभी भी जोखिम बरकरार है।’’रिजर्व बैंक ने जुलाई में पहली तिमाही मौद्रिक समीक्षा में वार्षिक मुद्रास्फीति का आंकड़ा 5 प्रतिशत रखा है।
रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘जुलाई में मुद्रास्फीति के उछलकर वापस 5.8 प्रतिशत पर पहुंच जाने और इ’धन और खाद्य पदार्थों के दाम बढऩे से भी मुद्रास्फीति दबाव दिखाई देता है। यह खाद्य मुद्रास्फीति में मई से दिखना शुरू हुआ है।’’ वैश्विक उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता वस्तुओं के दाम ज्यादातर अनुकूल बने हुये हैं लेकिन रपये में गिरावट की वजह से देश में इनके दाम बढऩे का जोखिम बढ गया है। इसके अलावा जुलाई में वैश्विक बाजार में इ’धन के दाम बढऩे का असर भी मुद्रास्फीति पर होगा।
