
चंबा । सांसद डा. राजन सुशांत ने सांसद निधि की समीक्षा बैठक में अधिकत्तर अधिकारियों के गैरहाजिर रहने पर कड़ा रोष जाहिर किया है। उन्होंने उपायुक्त को निर्देश दिए कि बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों के न आने का लिखित कारण पूछा जाए। अधिकारियों के बैठकों में शामिल होने पर ही जनता की समस्याओं का मौके पर निपटारा हो पता है।
उन्होंने उपायुक्त संदीप कदम से कहा कि दो सप्ताह में वह विजिलेंस एंड मानिटरिंग की बैठक करने जा रहे हैं। इसमें सभी विभागों के अधिकारियों के अलावा, केंद्र सरकार के विभागों व उपक्रमों और जिला के पावर प्रोजैक्टों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इस बैठक में विभाग के अधिकारी का होना जरूरी है, उनकी जगह उनके कनिष्ठ या अन्य प्रतिनिधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगली बैठक में लापरवाही बरती गई तो वे कड़ी कार्रवाई करने को बाध्य होंगे।
वीरवार को बचत भवन में आयोजित बैठक में एक बीडीओ समेत कुछ विभागों के अधिकारियों के न आने पर सांसद ने नाराजगी जाहिर की। इस दौरान जब डीएफओ चंबा के भी न पहुंचने का पता चला तो उन्होंने उन्हें तुरंत बुलाने को कहा। इसके बाद फोन करके उन्हें बुलाया गया। इस दौरान उन्होंने डीएफओ सलूणी की ओर से वापस लौटाए गए चैक पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह कार्य लंबे अर्से तक लटकाए रखने का कारण भी बताना होगा। अधिकारियों द्वारा विकास की राशि को लंबे समय तक लटकाए रखने और बाद में इसे लौटाने पर जवाब तलबी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में उन्होंने 12.50 करोड़ रुपये दिए थे, जिसमें से करीब तीन करोड़ के काम लटकाए गए थे। इनकी राशि उन्हें वापस लेनी पड़ी। इसी तरह इस जिला में मनरेगा के तहत 135 करोड़ रुपए केंद्र ने दिए थे, मगर जनवरी माह तक सिर्फ 57 करोड़ रुपए ही खर्च हुए थे। बाकी के 78 करोड़ रुपये खर्च न करके जिला के बेरोजगारों व विकास कार्यों को इस राशि से महरूम रखा गया। हाल ही में तैनात अधिकारियों ने उन्हें इस रकम को बाकी बचे समय में खर्च करने का आश्वासन दिया है। अगले दौरे में वह जिला चंबा के मनरेगा कार्यों की भी समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि चंबा प्रोजेक्टों से लाडा राशि को लेकर भी जवाबतलबी की जाएगी।
