
टनकपुर। शारदा नदी का रुख आबादी की ओर यूं ही नहीं घुमा। लोगों का कहना है कि शारदा घाट के समीप अप स्ट्रीम में राजस्व क्षेत्र में हुआ अवैध खनन इसका प्रमुख कारण है। खनन से बनी चैनल के कारण नदी का रुख आबादी की ओर मुड़ा और कई परिवारों को बेघर होना पड़ा है।
पिछले दिनों हुई बारिश से उफनाई शारदा ने नदी तट पर बसे पहाड़ी इलाकों में ही नहीं टनकपुर में भी जमकर तबाही मचाई। शारदा स्नानघाट, शवदाह गृह, यात्री विश्राम गृह समेत कई पक्के मकान और झाले नदी की भेंट चढ़ गए। रिकार्ड जलस्तर के साथ ही इस बार शारदा नदी का तेज प्रवाह स्नानघाट की ओर रहा, जिससे कई परिवारों के आशियाने तबाह हो गए। गत वर्षों तक नदी का रुख स्नानघाट से दूर था। स्नान के लिए पानी घाट की ओर लाने के लिए नगर पालिका को कई बार जेसीबी मशीन का सहारा लेना पड़ता था, मगर इस बार नदी की धारा का रुख खुद ब खुद घाट की ओर रहा। घाट के उत्तरी छोर पर हुए अवैध खनन को इसकी वजह माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि नायकगोठ धर्मकांटे के समीप हुए अवैध खनन के कारण ही नदी की धारा बदली है, जो अब खतरा बन रही है। पूर्व पालिका अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह रावत और भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष बगौली का कहना है कि शारदा से हुई तबाही के लिए प्रशासन दोषी है। खनन माफियाओं को खुली छूट देकर प्रशासन ने आपदा को न्यौता दिया है। उनका कहना है कि प्रशासन अवैध खनन पर अंकुश लगाता तो ऐसी आपदा नहीं आती।
