
बागेश्वर। खाद्य वस्तुओं में मिलावट और गुणवत्ता की कमी का पता लगाने की कोई भी सामान्य तकनीक अभी तक विकसित नहीं हो सकी है। त्यौहारों में सामान्य अनुभवों और गुण दोषों के आधार पर खोये की गुणवत्ता का पता लग सकता हैै।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियोें का कहना है कि अभी तक सिर्फ दूध की गुणवत्ता को परखने के यंत्र ही विकसित हो सके हैं। जिन्हें अपने पास रखकर अधिकारी, कर्मचारी, दुकानदार और ग्राहक ठगी से बच सकते हैं। राज्य में रुद्रपुर स्थित एकमात्र खाद्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला ही ऐसी संस्था है जो अधिकृत रूप से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बता सकती है। पर्वतीय क्षेत्र में त्यौहारों के मौकों पर मैदानों से नकली खोया आने की आशंका बनी रहती है। इस मामले में कुछ परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल करके काफी हद तक बचा जा सकता है, और प्रशासन से शिकायत की जा सकती है।
इंसेट-
कैसे पहचाने खोये की गुणवत्ता
-असली खोये को हाथ में रगड़ने पर घी की मात्रा मिलेगी
-असली खोया पानी में आसानी से घुलेगा, नकली नहीं।
-असली खोया मीठा,नकली खोया स्वादहीन
-असली खोया हल्का पीला, नकली सफेद।
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पैकेट बंद वस्तुओं का लेबल जरुर देखें
बागेश्वर। पैकेट के बाहर लेबल पर उत्पादक कंपनी का नाम, पूरा स्पष्ट पता, पैकिंग और एक्सपायरी डेट, लाट नंबर, बैच नंबर, वजन, अधिकतम मूल्य सहित उसमें मौजूद पोषक तत्वों का विवरण होना अनिवार्य है। खाद्य वस्तुओं के पैकेट पर हरे रंग का और अखाद्य चीजों के पैकेट पर लाल, भूरे रंग का गोला होना असली कंपनी की पहचान है।
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कहां और कैसे शिकायत करें
बागेश्वर। खाद्य सुरक्षा विभाग के पास शिकायत के लिए कोई भी नियंत्रण कक्ष अथवा हैल्प लाइन जैसी सुविधा नही है। शिकायतें खाद्य सुरक्षा अधिकारी अथवा खाद्य सुरक्षा अभिहीत अधिकारी के नाम पर सीएमओ कार्यालय, कलेक्ट्रेट अथवा तहसील में की जा सकती है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के मोबाइल पर सीधे भी सूचना दी जा सकती है।
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आरोपियों के खिलाफ कोई सख्त सजा नहीं
अल्मोड़ा/बागेश्वर। खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले साल 2012 में मावे और मिठाई के 10 सेंपल लिए इनमें से एक सेंपल फेल हुआ। विभाग ने संबंधित व्यक्ति से पांच हजार रुपये जुर्माना वसूला। किसी भी मामले में आरोपियों को जुर्माने के अलावा कोई सख्त सजा नहीं हुई। जिला अभिहीत अधिकारी मनीष सयाना ने बताया कि खाद्य पदार्थों के सब स्टेंडर्ड पाए जाने पर जुर्माना वसूला जाता है लेकिन यदि जांच के बाद कोई खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए घातक पाया जाए तो संबंधित लोगों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है और मामले की गंभीरता के हिसाब से छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। बागेश्वर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी केसी टम्टा ने बताया कि वस्तुओं की गुणवत्ता को तत्काल परखने की कोई तकनीक नहीं है। इनका परीक्षण रुद्रपुर की प्रयोगशाला में होता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही न्यायालय में मामला जाता है और फैसले के मुताबिक कार्रवाई होती है।
