
चौंतड़ा (मंडी)। हिमाचल विज्ञान अध्यापक संघ ने प्रदेश के विभिन्न शिक्षा खंडों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत बीआरसी (खंड स्रोत समन्वयक) को न हटाने की मांग की है। प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के राज्य प्रधान मनोज पाल, जिला मंडी इकाई के सचिव विनोद जसवाल, जोगिंद्रनगर खंड के प्रधान अनिल शर्मा और महासचिव भीम सिंह ने कहा कि नवंबर 2013 में प्रदेश सरकार ने जो नीति बनाई है उसमें कई तरह की खामियां हैं। इस नीति को शीघ्र निरस्त किया जाए।
संघ ने शिक्षा निदेशालय द्वारा 20 हजार टीजीटी शिक्षकों को 4-9-14 टाइम स्केल लाभांश और एरियर का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। इसका संघ कड़ा विरोध करता है। संघ ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांग की है कि नई नीति को लागू न कर बीआरसी को न हटाया जाए और टीजीटी शिक्षकों को 4-9-14 टाइम स्केल लाभांश और एरियर का भुगतान भी शीघ्र करें। प्रदेश में विभिन्न खंडों में कार्यरत बीआरसी के बढ़िया कार्य के चलते और योगदान के कारण प्रदेश शिक्षा विभाग को केंद्र सरकार तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सराहा है। वर्तमान में बीआरसी अध्यापक अपनेे खंडों में सुचारु रूप से अच्छा कार्य कर सर्व शिक्षा अभियान की नीतियों का निष्पादन कर रहे हैं। वर्ष 2002 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों पर प्रदेश में 124 ब्लाकों में प्राथमिक तथा अप्पर प्राथमिक स्तर पर 248 बीआरसी अध्यापकों और कर्मियों की नियुक्तियां पारदर्शी प्रणाली अपनाकर की थीं। प्रदेश सरकार 12 वर्षों की समय अवधि के बाद शिक्षा का अधिकार नियमावली 2010 की आड़ में 248 बीआरसी की नियुक्ति को रद कर रही है। नई नीति के अनुसार अब इन पदों पर नियुक्तियां एक वर्ष के लिए की जा रही है तथा जमा दो और स्नातक व बीएड में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता की शर्त को लागू किया जा रहा है।
