
शिमला। राज्य प्रारंभिक शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक अजय शर्मा को ‘इंटरनेशनल कांफ्रें स आन इमरजिंग ट्रेंड्ज इन साइंटिफि क रिसर्च’ में अपना शोधपत्र पढ़ने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह कांफ्रेंस कुआलालमपुर में 15-16 मार्च को एशियन इकोनोमिक एंड सोशल सोसाइटी और पाक पब्लिशिंग ग्रुप की ओर से आयोजित की जा रही है। शर्मा का शोधपत्र कांफ्रेंस की प्रोसीडिंग्ज में भी प्रकाशित होगा। शर्मा ने कहा कि यह शोधपत्र शोध और भौतिक विज्ञान के इतिहास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। एटम के विखंडन को सर जेडी कॉकक्रॉफ्ट एवं ईटी वाल्टन को 1951 का भौतिक विज्ञान का नोबेल प्राइज मिला था। यह पुरस्कार उन्हें 1932 में किए एक प्रयोग के लिए मिला था। इस प्रयोग में तीव्र गति वाले प्रोटोन की मदद से पहली बार एटम अणु को तोड़ा गया था। अजय शर्मा ने सर कॉकक्रॉफ्ट के प्रयोग के आंकड़ों की आलोचनात्मक व्याख्या की। अजय शर्मा ने शोधपत्र में निष्कर्ष निकाला है कि सर कॉकक्रॉफ्ट और डा. वाल्टन के 1932 के प्रयोग को पुन: किया जाना चाहिए। इनके प्रयोगों के बिना आइंस्टीन के समीकरण को सही नहीं मानना चाहिए।
