
मैहतपुर (ऊना)। जान हर वक्त हथेली पर, फिर भी अपने और परिवार की खातिर ड्यूटी बजाने को मजबूर हैं हजारों श्रमिक। ऊना जिले के विभिन्न उद्योगों में काम पर जाने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर आज तक पुख्ता कदम नहीं उठाए गए हैं। अग्नि सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले प्रबंधों की अनदेखी बड़े उद्योगाें में भी देखी जा रही है। अचानक किसी अनहोनी से बचने के लिए उद्योग प्रबंधकों के पास न तो कोई पुख्ता बंदोबस्त हैं और न ही तुरंत आग पर काबू पा लेने के लिए पर्याप्त प्रबंध। हैरत की बात यह है कि ऊना के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे छोटे बड़े 70 फीसदी उद्योगों के पास अग्निशमन विभाग द्वारा जारी होने वाला अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र ही नहीं है। ऐसे उद्योग जो फायर सेफ्टी के मानकों को पूरा नहीं करते, उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी अमल में नहीं लाई जा सकी है। दमकल विभाग के अफसरों की मानें तो उद्योग लगाने से पूर्व जिस प्रकार विद्युत बोर्ड, उद्योग विभाग तथा प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेना लाजमी है, ठीक उसी प्रकार दमकल विभाग से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना भी जरूरी है। महज 30 फीसदी उद्योगों को छोड़कर बाकी के 70 फीसदी उद्योगों ने आज दिन तक इस बेहद संजीदा प्रमाण पत्र को दमकल विभाग ने लेना जरूरी नहीं समझा। आग की घटना होने पर जब तक दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचती हैं, तब तक लाखों का सामान राख में तबदील हो चुका होता है। इससे पहले अनेक उद्योगों में आग की घटनाओं से उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उधर, दमकल अधिकारी कमल स्वरूप की मानें तो 70 फीसदी उद्योग बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के ही चल रहे हैं। इससे उद्योगों में आग से सुरक्षा बंदोबस्त का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जारी करते हैं हिदायतें : सुधीर
उद्योग महाप्रबंधक सुधीर शर्मा ने कहा कि फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट हर उद्योग के लिए लाजिमी है। समय-समय पर उद्योग प्रबंधकों को इस बाबत हिदायतें भी जारी की जाती हैं।
