शिमला गोलीकांड की होगी न्यायिक जांच

शिमला में पुलिस फायरिंग में युवक की मौत का मामला दूसरे दिन भी गरमाया रहा। भाजपा ने गोलीकांड का मुद्दा विधानसभा में उठाया और चर्चा न कराए जाने पर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि गोलीकांड की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

उधर एडीएम डॉ. एन के लट्ठ ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी है। उन्होंने घटना स्थल की वीडियोग्राफी कराई और डयूटी पर तैनात कांस्टेबलों से पूछताछ की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गोली युवक उदयवीर के पेट नहीं जांघ में लगी थी। उसकी मौत ज्यादा खून बहने से हुई है। समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।

विधानसभा में भाजपा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत गोलीकांड पर चरचा कराने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को वक्तव्य देने के लिए कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। उधर गोलीकांड को लेकर पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मुकदमा केवल एक कांस्टेबल के खिलाफ दर्ज किया गया है। गुरुवार को दो कांस्टेबलों पर केस दर्ज करने की बात कही गई थी। जिस कांस्टेबल की फायरिंग से युवक की मौत हुई है, वह अभी जंक यार्ड में ड्यूटी पर तैनात है।

इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज के रिकार्ड के मुताबिक उदयवीर को अस्पताल में रात एक बजे पहुंचाया गया। तब तक उदयवीर का काफी खून बह चुका था। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक रात तीन बजे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने उदयवीर के परिजनों को सूचित भी नहीं किया। दूसरे घायल युवक हर्ष को एक बजकर दस मिनट पर अस्पताल लाया गया।

गोली सेल्फ डिफेंस में चलाई गई
पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने कहा कि मामले की छानबीन चल रही है। अभी आरोपी कांस्टेबलों को ड्यूटी से नहीं हटाया गया है। क्रास एफआईआर दर्ज है। तथ्यों को एकत्रित किया जा रहा है। आईजी (साउथ रेंज) एपी सिद्दीकी ने कहा कि आरोपी कांस्टेबल नशे में नहीं थे। गोली सेल्फ डिफेंस में चलाई गई है और उस वक्त अंधेरा था।

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