मर रहे बाघ, सो रहा महकमा

देहरादून। गांवों में बाघ पालतू पशुओं को निवाला बना रहे हैं और बदले में ग्रामीण उन्हें मौत के घाट उतार रहे हैं। राज्य में लंबे समय से बाघों की रिवेंज किलिंग के मामले सामने आ रहे हैं। पांच माह में एक के बाद एक आठ बाघ इस तरह की घटनाओं में मारे जा चुके हैं।
कुमाऊं में ढेला, फाटो, आम पोखड़ा, बैलपड़ाव, पेचौरी, सावल देव, झिरना तो गढ़वाल में चीला, गौहरी, हरिद्वार, लैंसडौन क्षेत्र रिवेंज किलिंग के लिहाज से अति संवेदनशील हैं। दिक्कत यह है कि टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क या रिजर्व फारेस्ट से जुड़े होने के कारण संबंधित ग्रामीणों को पालतू पशुओं की मौत पर मुआवजा भी नहीं मिल पाता। इसका गुस्सा वे बाघों को मारकर निकालते हैं। अब तक सामने आए मामलों में रिवेंज किलिंग की बात इसलिए भी पुष्ट होती है कि सभी बाघों की खाल, हड्डी, नाखून, बाल सहित सभी अंग सुरक्षित बरामद किए गए हैं, यानी इन्हें तस्करी के लिए नहीं मारा गया था। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी इस ओर आंखें मूंदे हुए हैं। हैरत की बात यह है कि वन कर्मियों की पेट्रोलिंग के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जंगलों में बाघों के सड़े-गले शव मिलने पर अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा।

प्रतिशोध की घटनाएं
>> एक जून को आम पोखड़ा में एक बाघ का शव बरामद
>> 29 मई को आम पोखड़ा में पांच दिन पुराना बाघ का शव बरामद
>> 27 मई को ढेला रेंज में बाघिन का सड़ा हुआ शव मिला
>> 18 अप्रैल को रामनगर वन प्रभाग में बाघिन का शव बरामद
>> एक मार्च में रामनगर वन प्रभाग में एक बाघ का क्षत-विक्षत शव मिला
>> फरवरी 2013 राजाजी पार्क के गौहरी रेंज में बाघ का शिकार
>> फरवरी में ही तराई वेस्ट वन प्रभाग में बन्ना खेड़ा रेंज में बाघ का शव मिला
>> जनवरी 2013 कालागढ़ के पास पतरामपुर में शव बरामद हुआ था
>> अप्रैल 2012 में कुमाऊं के जसपुर रेंज में बाघ के शव पर कई निशान मिले
>> 2012 में ढेला रेंज में जहर से बाघ का शिकार

प्रदेश को स्वतंत्र वन मंत्री मिलना चाहिए, ताकि 65 फीसदी जंगल और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रहे। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर तत्काल अपना त्यागपत्र देकर अलग से वन मंत्री बनाना चाहिए।
-अनिल बलूनी, पूर्व उपाध्यक्ष वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति

वनकर्मी कहीं कोई पेट्रोलिंग नहीं कर रहे। ठीक से गश्त की जाए तो न बाघ घरेलू पशुओं को निवाला बनाएंगे और न ही ग्रामीण बाघों को जहर देकर मारेंगे। वन विभाग अधिकारियों को जागना चाहिए।
-गौरी मौलेखी, सदस्य पीएफए उत्तराखंड

कार्बेट की बाउंड्री और वन प्रभाग में बाघों का शव मिलना चिंतनीय है। मामलों की जांच होनी चाहिए। साथ ही ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए ग्रामीणों से भी सीधे संवाद स्थापित करना चाहिए।
-एएस नेगी, पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक

कुमाऊं के ढेला, आम पोखड़ा और फाटो रेंज के सभी तालाबों का पानी बदलने को कहा गया है। इनके आसपास दिन-रात कार्बेट रिजर्व और वन प्रभाग कर्मियों की संयुक्त पेट्रोलिंग को कहा गया है। तीनों रेजों में सघन अभियान चलाकर सभी मामलों की पड़ताल का निर्देश भी दिया है।
-एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव/ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक

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