खेतों में ही नहीं, अब घरों में घुसते हैं उत्पादी बंदर

मंडी। प्रदेश भर के किसान बंदरों व जंगली जानवरों की समस्या से काफी परेशान हैं, लेकिन आज तक समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया है। इस कारण किसान भी खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर हैं। वोट के लिए सियासी दल भी हर चुनाव में इस समस्या से निजात दिलाने के वायदे तो करते रहे, मगर धरातल पर कुछ नहीं हुआ।
प्रदेश में बंदरों व जंगली जानवरों की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। आज किसान इस समस्या से काफी परेशान हैं। प्रतिवर्ष 400 से 500 करोड़ नुकसान प्रदेश के किसानों को सीधे तौर पर उठाना पड़ रहा है, इससे किसान अब खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर हैं। चुनावों के दौरान वोट के लिए सियासी दल बंदरों व जंगली जानवरों की समस्या से निजात दिलाने के वायदे तो करते रहे, मगर कोई सरकार समस्या से निजात नहीं दिला पाई।
स्थानीय किसान प्रभु दयाल, बीरी सिंह, जीत राम, कृष्ण कुमार, लैहणू राम, सुभाष चंद, बालक राम, देव राज, विद्या देवी, यशोदा देवी आदि कहना है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टी वोट के लिए बड़े-बड़े वायदे करते हैं कि सत्ता में आते ही बंदरों व किसानों की समस्या से निजात दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बंदरों का इतना आतंक हो गया है कि अब लोग घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं। फसलों को तहस-नहस करने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों की इस समस्या को लेकर खेती बचाओ संघर्ष समिति व हिमाचल किसान सभा लंबे समय से संघर्ष कर रही है।

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