Uttarakhand Glacier Burst: रातभर चलाया जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन, सोमवार तक स्पष्ट होगी पूरी स्थिति – डीजीपी

Uttarakhand Glacier Burst: रातभर चलाया जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन, सोमवार तक स्पष्ट होगी पूरी स्थिति – डीजीपी

उत्तराखंड के चमोली जिले के रैणी में आई आपदा को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बचाव और राहत कार्य सरकार की पहली प्राथमिकता है, इसमें पूरी क्षमता से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चमोली में आई आपदा में कम से कम 125 लोगों के लापता होने की जानकारी है। नुकसान का आकलन जारी है, जबकि कारण भी पता लगाया जा रहा है। उन्होंने आपदा में मृतकों के परिवार को चार-चार लाख रुपये देने की घोषणा की है। वहीं चमोली जिला प्रशासन ने आठ शव मिलने की पुष्टि की है।

रविवार देर शाम आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि नीति घाटी में रैणी गांव के पास ऋषि गंगा में अचानक पानी और मलबा आने की जानकारी मिली थी। यहां पर दो जल विद्युत परियोजनाएं हैं और दोनों को ही नुकसान हुआ है। करीब 13 मेगावाट की एक परियोजना में 35-36 लोग काम करते थे। इसी परियोजना से पांच किलोमीटर की दूरी पर निर्माणाधीन एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में करीब 176 श्रमिक कार्यरत थे, उनका रिकॉर्ड गायब हो गया है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक बचाव एवं राहत कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया था। उन्होंने खुद हवाई सर्वे किया और इसके बाद गाड़ी से रैणी गांव तक पहुंचे। देर शाम तक पानी का बहाव श्रीनगर आते-आते धीमा हो गया था और इससे आगे किसी खतरे की आशंका नहीं जताई जा रही है। करीब 40 लोगों को बचा भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय सरकार का पूरा ध्यान राहत और बचाव पर है। देर शाम तक धौली गंगा पर रैणी गांव को अन्य से जोड़ने वाला 90 स्पान का मोटर पुल और चार अन्य झूला पुलों के बहने की जानकारी है। धौली गंगा के एक किनारे पर करीब 17 गांव हैं, जो सड़क न होने के कारण संपर्क से कट गए हैं। इनमें से 11 गांव माइग्रेटरी हैं और सर्दियों में इन गांवों के लोग गोपेश्वर आ जाते हैं।

केंद्र से मृतक आश्रितों को दो लाख गंभीर घायलों को 50 हजार मिलेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चमोली जिले के सीमांत गांव रैणी में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ की चपेट में आए मृतकों के आश्रितों को दो लाख और हादसे में गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की राहत देने को मंजूरी दे दी है। यह धनराशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से उत्तराखंड सरकार के माध्यम से दी जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी ट्वीट के माध्यम से साझा की।

कंपनी के खिलाफ रैणी गांव के लोगों ने दायर की थी जनहित याचिका
चमोली जिले के जिस रैणी गांव में रविवार को ग्लेशियर फटा, वहां पावर प्रोजेक्ट बनाने के विरोध में दो साल पहले कुछ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की थी, जो विचाराधीन है। जानकारी के मुताबिक रैणी गांव के कुंदन सिंह और अन्य ने वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। ग्रामीणों का आरोप था कि ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट के बहाने गांव व आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन हो रहा है और अवैध खनन से निकले  मलबे का नियमानुसार निस्तारण नहीं हो रहा है। इससे समूचे क्षेत्र में पर्यावरणीय नुकसान से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने याचिका के साथ कुछ फोटो और वीडियो भी हाईकोर्ट में दाखिल किए थे।

जोशीमठ में हुई डीजीपी की प्रेस वार्ता
डीजीपी अशोक कुमार ने जोशीमठ में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि रैणी में 2 पुलिस कर्मी सहित 27 लोग मिसिंग हैं। जबकि तपोवन परियोजना में 150 लोग काम कर रहे थे, जिनमें से 7 लोगों की बॉडी बरामद कर ली गई है। कितने लोग प्रभावित क्षेत्र से मिसिंग हैं, इसका अभी डाटा उपलब्ध नहीं है। तपोवन परियोजना की 900 मीटर लंबी टनल में मलबा घुसा है, उसे खोलने का काम चल रहा है। 150 मीटर तक टनल खोल दी गई है। रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। सोमवार तक पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

रैणी गांव के लिए एसडीआरएफ की टीमें रवाना
रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने की सूचना पर तत्काल एसडीआरएफ अलर्ट हो गई। ऋषिकेश से लेकर जोशीमठ तक एसडीआरएफ की सभी टीमों को अलर्ट कर दिया गया। एसडीआरएफ के मुताबिक सुबह करीब 10.55 मिनट पर जोशीमठ पोस्ट में तैनात हेड कांस्टेबल मंगल सिंह को जोशीमठ थाने से रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली थी।

जिसके बाद तत्काल एसडीआरएफ की सभी टीमों को अलर्ट कर दिया था। इसके बाद तत्काल दो टीमों को 11 बजे रैणी गांव के लिए रवाना कर दिया गया साथ ही सेनानायक नवनीत भुल्लर ने गौचर, श्रीनगर, रतूडा में तैनात एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट पर रहने के आदेश दिए। साढ़े ग्यारह बजे रैणी गांव में रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया।

जैसे-जैसे ग्लेशियर का पानी आगे बढ़ता गया सभी टीमें सक्रिय हो गई और लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया। करीब साढ़े बारह बजे श्रीगनगर की टीम को भी अलर्ट कर दिया गया। साथ ही दो टीमों को तपोवन, दो को जोशीमठ, एक टीम को श्रीनगर, एक कीर्तिनगर, एक टीम ऋषिकेश में तैनात किया गया। करीब चार बजे सेनानायक नवनीत भुल्लर भी रैणी गांव पहुंच गए थे। 

एसडीआरएफ और पुलिस मुख्यालय दून से रखे हुए थे कड़ी नजर 

रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने की सूचना पर एसडीआरएफ और पुलिस मुख्यालय अलर्ट मूड़ में आ गए। एसडीआरएफ मुख्यालय से सेनानायक नवनीत भुल्लर पहले तो मुख्यालय से ही स्थिति पर नजर रखे हुए थे, लेकिन स्थिति की नजाकत को देखते हुए एक बजे के करीब वह स्वयं हेलीकॉप्टर से जोशीमठ पहुंच गए रेस्क्यू अभियान की कमान संभाली। डीजीपी अशोक कुमार कुमाऊं दौरे पर हैं, वह वहीं से स्थिति पर पल-पल नजर रखे हुए हैं और मौके पर मौजूद अधिकारियों को दिशा निर्देश देते रहे।

दो सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश जारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि दोनों जल विद्युत परियोजनाओं की दो सुरंगे हैं। एक सुरंग करीब 150 मीटर की है और दूसरी करीब 250 मीटर की है। एक सुरंग में करीब 15 लोगों और दूसरी सुरंग में करीब 35 लोगों के फंसे होने का अनुमान है। 250 मीटर वाली सुरंग को देर शाम तक आईटीबीपी ने करीब 150 मीटर खोद लिया था। यहां मशीन न पहुंच पाने के कारण काम धीमी गति से हो रहा है।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री ने किए फोन
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने घटना की जानकारी मिलते ही फोन किया। उस समय वे हेलीकाप्टर में थे। हवाई सर्वे के बाद वे जिस समय लौट रहे थे, उस समय फिर फोन आया। प्रधानमंत्री ने हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया है। इसी तरह राष्ट्रपति ने भी फोन किया और हर तरह की मदद का आश्वासन दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी दो बार फोन कर जानकारी ली। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्री ने भी फोन किया।

उत्तराखंड की हरसंभव मदद करने को तैयार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उत्तराखंड को हरसंभव मदद देने के लिए दिल्ली सरकार तैयार है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर ट्वीट में कहा कि चमोली जिले से आपदा की घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सभी लोगों की सुरक्षा व कुशलता की प्रार्थना की है। आपदा की इस घड़ी में उत्तराखंड की जनता तक हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार तैयार है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट में लिखा है कि उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही से आहत हूं। इस चुनौतीपूर्ण समय में हम उत्तराखंड के साथ एकजुटता में खड़े हैं।

स्थानीय लोगों के हताहत होने की जानकारी नहीं
मुख्यमंत्री ने बताया कि जल विद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले स्थानीय लोग रविवार होने के कारण अवकाश पर थे। रैणी गांव के एक भेड़ पालक की भेड़ आपदा की भेंट चढ़ने की जानकारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सबसे पहले सोशल मीडिया से जानकारी मिली और अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। आपदा के समय संवाद का स्तर बेहतर रहा और राहत एवं बचाव टीम तुरंत सक्रिय हुईं। 

रुद्रप्रयाग तक आते-आते सामान्य हो गया था बहाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश, हरिद्वार, श्रीनगर आदि के लिए हालात सामान्य हैं। एतिहातन तटीय इलाके खाली कराए गए हैं और श्रीनगर के बांध का पानी कम कर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हिमस्खलन है या कोई झील टूटी है, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इतना जरूर कह सकती है कि राहत और बचाव के लिए सभी कुछ मौजूद है।

सेना और आईटीबीपी के जवानों ने संभाला मोर्चा 
बचाव व राहत कार्यों के लिए सेना और आईटीबीपी के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है। आईटीबीपी के कमांडेंट शेंदिल कुमार के मुताबिक आईटीबीपी के 250 जवान रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए हैं। इनमें मेडिकल अफसर सहित आठ अधिकारी भी शामिल हैं। वे एनटीपीसी पॉवर हाउस के आसपास के इलाके में कार्य कर रहे हैं। गौचर में आईटीबीपी की आठवीं बटालियन की दो टीमें जिसमें 90 जवान हैं, घटनास्थल के लिए निकल चुके हैं। इसके अलावा गौचर एवं देहरादून में एक-एक कंपनी आदेश की प्रतीक्षा कर रही है। उत्तरकाशी में मातली एवं महिडाण्डा में भी एक-एक कंपनी इस टास्क के लिए तैयार है। इसके अलावा स्पेशलिस्ट माउंटयरिंग एवं स्कीइंग इंस्टीट्यूट औली की दो टीमें तपोवन एरिया में पहुंच चुकी है। 

सेना के कर्नल एस शंकर के मुताबिक, जोशीमठ से सेना के 40 जवानों का एक दल तपोवन पहुंच गया है। एक दल जोशीमठ में है। दो सैन्य दल औली से जोशीमठ के लिए रिलीफ ऑपरेशन के लिए आ चुके हैं। रुद्रप्रयाग में दो सैन्य दल तैयार रखे गए है। एक इंजीनियरिंग टास्क फोर्स जोशीमठ से तपोवन पहुंच गया है। दो मेडिकल आफिसर एवं दो एंबुलेंस तपोवन पहुंच चुके हैं। आर्मी का हेलीपैड सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए चालू है। कम्यूनिकेशन के लिए सिविल लाइन चालू है। बरेली से दो हेलीकॉप्टर भी जोशीमठ पहुंच गए हैं।

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