70 इकाइयां बंद होने की कगार पर

बद्दी (सोलन)। गत्ता उद्योग संघ की बैठक में बाहरी राज्यों से आने वाले कच्चे माल के उद्योगों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। संघ का तर्क है कि गत्ता उत्पादन के लिए 80 फीसदी कच्चा माल बाहरी प्रदेशों से आ रहा है, लेकिन मनमानी कीमतों के चलते प्रदेश के गत्ता उद्योग की करीब 70 इकाइयां बंद होने के कगार पर हैं। कुंभ मेले के दौरान यूपी से आने वाले कच्चे माल की कीमतें अचानक बढ़ा दी हैं। नतीजतन बाजार में तय रेट देना मुश्किल हो रहा है।
बैठक में प्रदेश सरकार से मांग की है कि पेपर मिल की ओर से बढ़ाए जा रहे कच्चे माल के रेट पर चेकआउट रखा जाए। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से भी मांग की है कि पेपर मिलों की इस तानाशाही की रिपोर्ट केंद्र सरकार को दें। संघ ने चेतावनी दी है कि शीघ्र की भारत सरकार से पेपर मिल्स एसोसिएशन पर मिल कर रेट बढ़ाने एवं माल की कमी करके गत्ता उद्योग को बंद कराने पर कंपीटीशन एक्ट में कार्रवाई करेंगे।

दो पाटों में पिसा गत्ता उद्योग
प्रदेश अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि गत्ता उद्योग पेपर मिल संचालक और ग्राहकों के बीच में पीस कर रह गया है। बाहरी राज्यों के पेपर मिल संचालकों की तानाशाही के चलते दो माह से कच्चे माल के अचानक बढ़ा दिए हैं। नतीजतन प्रदेश की 70 इकाइयां शीघ्र ही बंद होने के कगार पर हैं।

कुंभ के कारण मनमानी : जैन
गत्ता उद्योग की बीबीएन इकाई के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन के अनुसार एक महीने से यूपी की सभी पेपर मिलों ने रेट यह कह कर बढ़ा दिए हैं कि कुंभ मेले के कारण मिल चलाने पर नदियों में जल प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए फैक्टरियां बद कर दी हैं हालांकि जो पेपर मिल्स एगभनो वेस्ट से चलती है उन्हीं पर मिल चलाने की पाबंदी है जबकि जो मिल वेस्ट पेपर से माल बनाती है उन पर पाबंदी नहीं है।

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