सरकारी मुफ्त योजना की निकली हवा, मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रही दवा

सरकारी मुफ्त योजना की निकली हवा, मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रही दवा

मोहाली। भले ही सेहत विभाग की ओर से आदेश जारी कि गए हैं कि सरकारी अस्पतालों से ही मरीजों को दवाइयां मुफ्त मुहैया करवाई जाएंगी। उन्हें बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। लेकिन फेज-छह स्थित मेडिकल कॉलेज डॉ. बीआर आंबेडकर राज्य आयुर्विज्ञान संस्थान में अब भी मरीजों को बाहर बाजार में दुकानों पर जाकर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। कुछ दवाइयां तो अस्पताल में मिल रही हैं, जबकि बहुत सी दवाइयां खरीदने के लिए उन्हें बाजार में दुकानों पर जाना पड़ रहा है। इससे साफ है कि सरकारी मुफ्त दवा योजना की हवा निकल चुकी है। इस चक्कर में कुछ लोगों का तो बजट तक बिगड़ रहा है। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल का दौरा किया। साथ ही दवाइयों को लेकर आ रही दिक्कत को लेकर मरीजों से बातचीत की। हालांकि इससे पहले सेहत विभाग ने साफ किया था कि अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं है। अगर दवा की कमी आती है तो वेयर हाउस से तुरंत दवाइयां मंगवाई जाएं।

सिर्फ एक दवा अस्पताल से मिली, बाकी बाहर से
मेरे पति सेहत विभाग में थे। उनके होते हुए यहां इस तरह की कभी कोई समस्या नहीं थी। मेरी आंख का ऑपरेशन होना है। मुझे मुफ्त दवा केंद्र से सिर्फ एक दवा ही मिली है। बाकी सभी बाहर से लेनी पड़ेंगी। इस उम्र में जहां मैं सिर्फ पति की पेंशन पर निर्भर हूं। ऐसे में मुझ जैसे लोगों को अस्पताल से ही दवा मिलनी चाहिए। -शताब कौर, फेज-एक

सिर्फ दो दवाईयां अस्पताल में मिलीं
मैं पेट्रोल पंप पर काम करता हूं। पूरा दिन खड़े रहने का काम है। पिछले कुछ दिनों से पेट में दर्द हो रहा था। वीरवार को ज्यादा हुआ तो इमरजेंसी में दिखाया और मुझे ड्रिप लगाने के बाद बाकी दवा बाहर से लेने के लिए कहा। यहां के मुफ्त केंद्र से सिर्फ दो ही दवा मिली हैं, बाकी बाहर से लेने जा रहा हूं। -प्रेम सिंह, सेक्टर-82
अकसर बाहर से लेनी पड़ती हैं दवाइयां
मां के घुटनों में अकसर दर्द रहता है। यहां के ऑर्थो डॉक्टर अच्छे हैं। उनकी ओर से महंगी दवा भी लिखी जाती है। हम हर बार कुराली से यहां दिखाने आते हैं। लेकिन हर बार एक हजार रुपये से ऊपर का खर्च आ जाता है। यहां से एक दो ही दवाएं मिलती हैं। बाकी बाहर से लेनी पड़ती हैं। वहीं पापा को भी डिस्क की समस्या रहती है। कभी पापा तो कभी मां दोनों का दवाओं का खर्च काफी पड़ जाएगी।
-अनमोल प्रीत सिंह, कुराली
हर बार दवा लेने में आती है दिक्कत
एक हादसे में मेरी नाक पर चोट लग गई थी। मैं प्रिटिंग प्रेस में काम करता हूं। मेरा ईएसआई का कार्ड भी बना हुआ है। मुझे अक्सर तकलीफ रहती है। हर बार ईएसआई में दिखाता हूं, तो वहां से फेज-6 में भेज दिया जाता है। लेकिन हर बार मुझे बाहर से ही महंगी दवा लिख दी जाती है। मैं चक्कर काट-काट कर थक गया हूं। ऊपर से कमाई भी कम है, ऐसे में हर महीने हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। अगर मुझे दवा ही बाहर से लेनी है तो इस ईएसआई कार्ड का क्या फायदा। -छोटू, फेज-8

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