संशोधित डीपीआर भेजी, शिमला-मटौर फोरलेन की लागत 400 करोड़ बढ़ी

संशोधित डीपीआर भेजी, शिमला-मटौर फोरलेन की लागत 400 करोड़ बढ़ी

हमीरपुर
बहुप्रतिक्षित फोरलेन शिमला-मटौर प्रोजेक्ट पर देरी की मार पड़ी है। इस फोरलेन निर्माण की प्रथम चरण की लागत बढ़ गई है। पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मटौर से ज्वालामुखी तक 40 किलोमीटर फोरलेन का अनुमानित खर्च 1000 करोड़ रुपये बताया था, जो अब 1400 करोड़ पहुंच गया है। एनएचएआई ने अब मंत्रालय को बढ़ी हुई लागत की संशोधित डीपीआर भेज दी है।

वर्ष 2016 में हमीरपुर दौरे के दौरान तत्कालीन केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस फोरलेन की घोषणा की थी जबकि वर्ष 2017 में अधिसूचना जारी हुई। मटौर से शिमला तक फोरलेन के लिए पांच अलग-अलग पैकेज में इस प्रोजेक्ट को बांटा गया। सबसे पहले मटौर से ज्वालामुखी तक पांचवें पैकेज के लिए भूमि अधिग्रहण व डीपीआर बनाने का कार्य शुरू हुआ था। 35 फीसदी भूमि अधिग्रहण का कार्य भी अभी शेष है। एनएचएआई ने पहले 15 दिसंबर तक टेंडर प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया था, लेकिन निर्माण कार्य की लागत बढ़ने से अब मंत्रालय से स्वीकृति के लिए फाइल भेजी गई है। प्राधिकरण का दावा है कि जनवरी तक पांचवें पैकेज का टेंडर हो जाएगा।
500 भवनों पर चलेगा बुलडोजर
मटौर से ज्वालामुखी तक फोरलेन निर्माण के चलते इसकी जद में 500 भवन आ रहे हैं। भूमि अधिग्रहण और फोरलेन सर्वे में इन भवनों की गिनती हुई है। इसके अलावा सैकड़ों पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलेगी। लेकिन अधिकतर पेड़ वन भूमि के अंतर्गत हैं, जिसके चलते फोरेस्ट क्लीयरेंस की फाइल बनाई जा रही है।

मटौर से ज्वालामुखी तक फोरलेन के लिए 65 फीसदी से अधिक भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। 15 दिसंबर तक टेंडर का लक्ष्य रखा था, लेकिन लागत बढ़ने के कारण संशोधित डीपीआर अब मंत्रालय को भेजी गई है। मंत्रालय से स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
– योगेश राउत, परियोजना निदेशक, एनएचएआई हमीरपुर

 

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