शोधार्थियों ने विकसित की टाइलों से बिजली उत्पादन की तकनीक

शोधार्थियों ने विकसित की टाइलों से बिजली उत्पादन की तकनीक

मंडी
अब घरों में फर्श पर बिछने वाली टाइलों से भी बिजली बनेगी। सड़कों में तारकोल के नीचे टाइलें बिछाने के बाद मार्ग पर दौड़ने वाले वाहनों से बिजली बनेगी, जिससे सिग्नल जगमग होंगे।   यह संभव होगा पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री के उपयोग से, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने ईजाद किया है। इसे सतह से नीचे बिछाया जाएगा। यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में तबदील करेगा। ये सामग्रियां स्ट्रेस पड़ने पर विद्युत उत्पादन बढ़ा देंगी। इनके शोध परिणाम इंजीनियरिंग रिपोर्ट्स नामक जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। शोधपत्र में सह-लेखक रिसर्च स्कॉलर राज किरण के अलावा सौरव शर्मा के साथ आईआईटी मंडी के पूर्व छात्र डॉ. अनुरुद्ध कुमार ने भी काम किया है।

ग्रेडेड पोलिंग से 100 गुणा बढ़ेगी आउटपुट
शोधार्थियों ने एक ग्रेडेड नामक तकनीक विकसित की है, जिससे पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री का आउटपुट 100 गुना से अधिक बढ़ सकता है। विद्युत उत्पादन बहुत बढ़ाने के लिए संख्यात्मक तकनीकों की मदद से विभिन्न यांत्रिक तनावों का उपयोग किया है। वर्तमान में ग्रेडेड पोलिंग का व्यावहारिक उपयोग चुनौतीपूर्ण है।
विपरीत प्रक्रिया भी कर सकती है पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री
पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री विद्युत ऊर्जा में यांत्रिक गति भी उत्पन्न कर सकती है। इस तरह मेकेनिकल को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलने की की क्षमता बढ़ने से इंजीनियरिंग के उपयोगों में काम आ सकती है। इससे जैसे कंपन और शोर कम करना आसान होगा। इससे अत्याधुनिक तकनीकी उपयोग भी होंगे। जैसे कि अंतरिक्ष में उपग्रह के एंटीना को सही जगह रखना और संचालन करना।

 

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