शिवालय में आज से गूंजेगा हर हर महादेव का जयकारा

शिवालय में आज से गूंजेगा हर हर महादेव का जयकारा

चंडीगढ़। सावन मास वीरवार से शुरू हो जाएगा। शहर के मंदिरों के सभी शिवालय पूरे महीने हर हर महादेव के जयकारों से गूंजेंगे। मंदिर कमेटियों ने सभी तैयारियां पूरी की ली हैं। शिवालयों में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक होगा। मंदिर सुबह पांच बजे खुल जाएंगे। मंदिर प्रबंधन की ओर से भक्तों को परेशानी न हो इसके लिए प्रयास किए हैं। मंदिरों में हर सोमवार को खीर और मालपुआ का लंगर लगाया जाएगा।

सनातन हिंदू धर्म में सभी महीने, नक्षत्र आदि पूज्य हैं और सभी महीनों व अतिथियों आदि के अधिष्ठात्री देवता भी होते हैं। इसी परंपरा में श्रावण मास संवत का पांचवां महीना पड़ता है। श्रावण मास के अधिष्ठात्री देवता भगवान महादेव महादेव हैं। यह कहना है देवालय पूजक परिषद के संरक्षक और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री का।

उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने में शिव पुराण की कथा सुनना भी अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने कहा कि जो शिव कथा सुनते हैं भगवान गौरी शंकर उस श्रोता के हृदय में आकर के विराजमान हो जाते हैं। श्री खेड़ा शिव मंदिर में भी शिव महापुराण की कथा गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हो रही है इस कथा का समय सायं 6:00 से 7:00 बजे तक निश्चित किया गया है। आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री जी शिव महापुराण की कथा सुनाएंगे। सेक्टर-24 के प्राचीन शिव मंदिर शिवालय खेमपुरी में सावन में रुद्राभिषेक और शृंगार होगा। यह 16 अगस्त तक चलेगा। सात अगस्त को वार्षिक सावन का भंडारा होगा। 16 अगस्त को सामूहित रुद्राभिषेक और आरती होगी।
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि श्रावण मास में भगवान महादेव की पूजा शिवलिंग के रूप में करें। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध ,दही शहद, घी, शक्कर, पंचामृत से अभिषेक करें। शुद्ध स्नान कराकर वस्त्र धारण करवाएं एवं यज्ञोपवीत पहनाएं। चंदन, अक्षत, पुष्प, बेलपत्र, भांग, धतूरा दूर्वा, धूप,दीप, प्रसाद, पान पत्र, फल आदि भगवान को अर्पित करें।
सावन मास में पूजा के फल
आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि सावन मास में शिव पूजन करने से कुंवारी कन्याओं को अच्छे घर वर की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों को मनचाही विद्या प्राप्त होती है। व्यापार में वृद्धि के लिए रुद्राभिषेक व श्रावण के व्रत करने चाहिएं।
– लक्ष्मी वृद्धि के लिए गन्ने के रस से शंकर जी का अभिषेक करें।
– धन वृद्धि के लिए शहद व घी से अभिषेक करें।
– मोक्ष प्राप्ति के लिए गंगाजल से अभिषेक करें।
– रोग निवारण के लिए कुशा के जल से अभिषेक करें।
– दोनों पंचमियों में नाग नागिन का जोड़ा शिवलिंग पर अर्पित करने से कालसर्प दोष की शांति होती है।

Related posts