शिमला-कुल्लू प्राकृतिक आपदा जिला घोषित हों

रोहडू। प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ ने जिला शिमला तथा कुल्लू को किन्नौर की तर्ज पर प्राकृतिक आपदा जिला घोषित करने की मांग उठाई है। संघ के अनुसार सभी सेब बाहुल क्षेत्रों में बागवानों को बर्फबारी से भारी नुकसान हुआ है। लाखों सेब के पौधे क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
संघ के प्रदेश महासचिव हरीश चौहान ने बताया कि जिला शिमला, कुल्लू तथा मंडी जिले के सेब बाहुल क्षेत्रों में इस वर्ष भारी बर्फबारी से करीब तीन लाख सेब के पौधे क्षतिग्रस्त हुए हैं। एक लाख के करीब नाशपाती के पौधों को तथा बीस हजार चेरी के पौधों को क्षति पहुंची है। इससे बागवानों को करीब दो सौ करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सरकार ने किन्नौर जिले को तो प्राकृतिक आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया है। लेकिन, शिमला तथा कुल्लू जिला सहित अन्य सेब बाहुल क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में अभी तक नहीं लाया गया है। जबकि, प्रदेश सरकार ने प्रति बागवान नुकसान का आकलन कर राहत देने की बात कही थी। अभी तक सरकार ने मोटे तौर पर नुकसान का आकलन कर खानापूर्ति पूरी की है। गांव-गांव जाकर प्रति बागवान नुकसान का अनुमान नहीं लगाया है। बर्फबारी से बागवानों के पेड़ तो क्षतिग्रस्त हुए ही हैं, साथ ही बड़े पौधे भी जड़ समेत उखड़ कर गिर गए हैं। संघ की मांग है कि किन्नौर की तर्ज पर जिला शिमला तथा कुल्लू को भी प्राकृतिक आपदा जिलों में शामिल कर बागवानों को हर संभव राहत प्रदान की जाए।

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