शिक्षा विभाग का किताब खरीद मामला विवादों में फंसा, सरकार ने बैठाई जांच

शिक्षा विभाग का किताब खरीद मामला विवादों में फंसा, सरकार ने बैठाई जांच

शिमला
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए प्रकाशकों के माध्यम से खरीदी जा रही पुस्तकों का मामला विवादों में फंस गया है। घोटाले की आशंका के चलते सरकार ने इस मामले में जांच बैठा दी है। समग्र शिक्षा अभियान का राज्य परियोजना कार्यालय पुस्तकालयों के लिए दस करोड़ रुपये की किताबों की खरीद कर रहा है। वर्क ऑर्डर जारी करने के लिए 49 फर्में शॉर्ट लिस्ट की गई हैं। आरोप है कि चयनित 33 फर्मों के पते आठ पतों पर दर्ज हैं।

दिल्ली की एक कूरियर कंपनी के पते को आठ प्रकाशकों ने अपना पता बताकर विभाग के पास दर्ज करवाया है। उत्तर-मध्य भारत हिंदी प्रकाशक संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा सचिव को शिकायत भेजी है। शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि अभी पुस्तकें खरीदने के लिए वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया है। प्रकाशकों के चयन को लेकर शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच की जाएगी।

उत्तर-मध्य भारत हिंदी प्रकाशक संघ के अध्यक्ष विक्रम द्विवेदी ने बताया कि करीब दस करोड़ की पुस्तक खरीद प्रक्रिया में 99 फीसदी कार्य गिनती के चंद लोगों को देने का उपक्रम रचा जा रहा है। करीब 900 प्रकाशकों ने अपनी श्रेष्ठ पुस्तकें जमा करवाई हैं। अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ के उपाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश के प्रभारी आरके यादव ने बताया कि इस संदर्भ में सभी दस्तावेजों को जमा करवा दिया है। सरकार ने गंभीरता से जांच नहीं की तो संघ कोर्ट जाएगा। गांधीवादी तरीके से विरोध किया जाएगा। दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर मार्च भी निकाला जाएगा। 

35 के बजाय 10 फीसदी छूट में खरीदी जा रही पुस्तकें
आरोप है कि 35 की जगह 10 फीसदी छूट में पुस्तकें खरीदने का प्रावधान किया है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी प्रकाशकों से 35 फीसदी छूट पर पुस्तकें ली गई हैं। पूरे देश में समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय के तहत हो रहे पुस्तकों के क्रय में 35 फीसदी छूट सर्वमान्य रूप से निर्धारित है।

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