शहीद बेटे को दूल्हे की तरह विदा करूंगा, बोले शहीद अंकेश के पिता

शहीद बेटे को दूल्हे की तरह विदा करूंगा, बोले शहीद अंकेश के पिता

भराड़ी (बिलासपुर)
मैं अपने शहीद बेटे को दूल्हे की तरह विदा करूंगा। बेटे की अंतिम विदाई बैंड के साथ राष्ट्रीय गान की धुन में होगी, ताकि क्षेत्र के नौजवान सेना में जाने के लिए प्रेरित हों। शहीद अंकेश के पिता पांचा राम ने रुंधे गले से जब ये शब्द कहे तो वहां मौजूद हर किसी की आंखों में आंसू आ गए। मुश्किल की इस घड़ी में भी फौजी पिता के हौसले को हर कोई सलाम कर रहा है। अरुणाचल की पहाड़ियों के बीच बर्फीले तूफान में सेऊ गांव के अंकेश देश के लिए शहीद हो गए हैं। शहीद अंकेश के माता-पिता सहित गांव के लोग बीती 6 फरवरी से अंकेश के इंतजार में सोए नहीं हैं।

शहीद के पिता खुद को संभालते हुए लोगों से बेटे की शहादत के बारे में नाज से बात कर रहे हैं। वहीं ग्राम सुधार समिति सेऊ ने शहीद अंकेश के लिए मुक्ति धाम को दुल्हन की तरह सजा दिया है। अंतिम विदाई के लिए पूरा गांव एकजुट होकर कार्य कर रहा है। अंकेश के पिता ने कहा कि सैकड़ों लोग जो उनके घर पर मौजूद हैं, वे इस दुख की घड़ी में उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपने चार बेटे देश के लिए कुर्बान किए थे, मेरा बेटा भी देश के लिए शहीद हो गया। इस पर मुझे फख्र है।

शहीद जवानों की पार्थिव देह आज पहुंचने की संभावना
वहीं, अरुणाचल के कामंग सेक्टर में चार फरवरी को बर्फीले तूफान में शहीद हुए हिमाचल के दो जवानों की पार्थिव देह गुरुवार को उनके पैत़ृक गांव नहीं पहुंच पाई। बताया जा रहा है कि अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का शहीदों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम था, लेकिन गुरुवार दोपहर बाद तक कार्यक्रम न होने के कारण अब शुक्रवार दोपहर बाद पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की उम्मीद है। घुमारवीं उपमंडल के सेऊ गांव के अंकेश भारद्वाज और बैजनाथ उपमंडल के कंदराल गांव के लोअर महेश गढ़ निवासी राकेश सिंह अरुणाचल में शहीद हो गए हैं। परिजन भूखे प्यासे अपने शहीद बेटों की पार्थिव देह घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। 6 दिन से सो नहीं पाए हैं। घरों में माहौल गमगीन है। एसडीएम सलीम आजम ने बताया कि शहीद राकेश सिंह के पार्थिव शरीर के शुक्रवार दोपहर तक आने की उम्मीद की जा रही है।

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