वैज्ञानिकों ने बीमारी रोधक रूट स्टॉक किए विकसित, सेब उत्पादकों को राहत

वैज्ञानिकों ने बीमारी रोधक रूट स्टॉक किए विकसित, सेब उत्पादकों को राहत

शिमला
देश के लाखों बागवानों को अब सेब के बीमारी रोधक रूट स्टॉक मिले पाएंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के शिमला केंद्र के वैज्ञानिकों ने नए रूट स्टॉक विकसित किए हैं, जिससे सेब की फसल बीमारियों से नष्ट होने से बच सकेगी। फसल को वूली एफिड और पाउडरी मिल्ड्यू नष्ट नहीं कर पाएगी। नए रूट स्टॉक से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सहित देश के उन राज्यों के सेब उत्पादकों को राहत मिलेगी, जहां इन रोगों से सेब की फसल तबाह होती रही है।

आईसीएआर शिमला केंद्र के वैज्ञानिकों ने पूसा एप्पल रूट स्टॉक 101 विकसित किया है। यह रूट स्टॉक ठंडे और थोड़े गर्म इलाकों में सफल रहा है। नए रूट स्टॉक का फील्ड ट्रायल भी सफल रहा है। दो साल के बाद यह बागवानों को उपलब्ध कराया जाएगा। संस्थान के वैज्ञानिक बताते हैं कि नया बीमारी रोधक रूट स्टॉक विकसित करने के लिए सिक्किम से पौधा लाया गया है। इससे पूसा एप्पल रूट स्टॉक 101 विकसित करने में मदद मिली है।

टिश्यू कल्चर से तैयार करेंगे रूट स्टॉक
आईसीएआर शिमला केंद्र के अध्यक्ष कल्लोल प्रामाणिक कहते हैं कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने वूली एफिड और पाउडरी मिल्ड्यू रोग रोधक रूट स्टॉक विकसित करने में सफलता हासिल की है।

सेब की किस्म के हिसाब से बागवान इसे इस्तेमाल कर सकते हैं। यह रूट स्टॉक ठंडे और गर्म इलाकों में सफल रहा है। बागवानों को यह रूट स्टॉक टिश्यू कल्चर से तैयार करके उपलब्ध कराया जाएगा। इसे पूसा एप्पल रूट स्टॉक 101 नाम दिया गया है।

 

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