लोक सेवा में अवार्ड, पर 1100 स्ट्रीट लाइटें खराब

शिमला। नगर निगम शिमला को लोक सेवा के लिए देश के अन्य शहरों के मुकाबले अव्वल चुना गया है। 22 फरवरी को नई दिल्ली में महापौर संजय चौहान को सम्मानित किया जाना है। लेकिन, दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहर में एक हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट प्वाइंट खराब हैं। खुद निगम के सर्वे में यह बात सामने आई है। शहर में 5600 स्ट्रीट लाइट्स के प्वाइंट्स हैं, जिनमें से 1100 प्वाइंट्स नॉन फंक्शनल हैं जिसका खामियाजा रात के समय लोगों को ठोकरें खाकर भुगतना पड़ रहा है।
नगर निगम के तहत आने वाले पच्चीस वार्डों में 5600 के करीब स्ट्रीट लाइटों के प्वाइंट लगाए गए हैं। इनमें से 20 प्रतिशत लाइटें नॉन फंक्शनल हैं। यानी 1100 के करीब शहर में स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। भराड़ी, रुलदूभट्टा, कैथू, समरहिल, टुटू, बालूगंज, टुटीकंडी, फागली, कृष्णानगर, जाखू, ढली, कनलोग, चम्याणा, मल्याणा, कसुम्पटी,, संजौली, छोटा शिमला पटयोग और खलीणी वार्ड के लोगों को खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों के कारण अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के बीचोंबीच बसे वार्ड राम बाजार, लोअर बाजार और वीआईपी वार्ड बैनमोर में हालत कुछ ठीक है लेकिन उक्त वार्डों में भी जहां स्ट्रीट लाइटों की अधिक जरूरत है वहां नए प्वाइंट लगाने की जहमत नहीं उठाई गई है। माल रोड से मुख्यमंत्री आवास और डीसी आफिस से चौड़ा मैदान तक के मार्ग को दूधिया रोशनी से चमकाकर नगर निगम और बिजली बोर्ड ने शहर के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को बीते कई वर्षों में केवल सब्जबाग दिखाए हैं।


रखरखाव का जिम्मा बिजली कंपनी के पास
नगर निगम के पच्चीस वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की देखरेख का जिम्मा बिजली कंपनी देख रही है। लाइटों की मरम्मत और रखरखाव पर प्रति माह कंपनी को नगर निगम करीब तीन लाख देता है। बिजली की मासिक खपत का खर्च करीब बारह लाख है। इतना खर्च करने के बावजूद भी शहर में अधिकांश स्ट्रीट लाइटें खराब हैं।

अब ज्वाइंट कमेटी बनाने की कवायद
नगर निगम और बिजली कंपनी के अधिकारियों ने स्ट्रीट लाइटाें के रखरखाव के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला लिया है। सरकार की मंजूरी के बाद स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त रखने के लिए सामान कमेटी की सिफारिश पर खरीदा जाएगा। निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है कि लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

शिमला शहर में कुल स्ट्रीट लाइटें : 5600
रखरखाव के अभाव में बंद पड़े प्वाइंट : 1100
प्रति माह मरम्मत पर आने वाला खर्च : तीन लाख
बिजली की खपत का मासिक बिल : बारह लाख

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