लाहौल में 56 बिजली परियोजनाओं का विरोध तेज, चमोली जल प्रलय से सबक लेने की दी नसीहत

लाहौल में 56 बिजली परियोजनाओं का विरोध तेज, चमोली जल प्रलय से सबक लेने की दी नसीहत

पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के चमोली में जल प्रलय के बाद हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में प्रस्तावित 56 बिजली परियोजनाओं के खिलाफ लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। जिले के सबसे बड़े गांव गोशाल और तांदी के लोगों ने बैठक कर सरकार को चमोली की घटना से सबक लेने की नसीहत दी है। परियोजनाओं को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न देने का पंचायत से प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। लोगों ने मांग की है कि चंद्रभागा नदी पर प्रस्तावित पावर प्रोजेक्टों को रद्द किया जाए। 

छह माह तक बर्फ से घिरे रहने और प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील यह जिला भूकंप की दृष्टि से जोन 4 में आता है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते प्राकृतिक आपदाएं आने पर भयंकर जानमाल का नुकसान हो सकता है। ऐसे में लोगों ने बिजली परियोजनाओं के खिलाफ पूरे जिले में जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। सेव लाहौल-स्पीति सोसायटी पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति घाटी के लोगों को जागरूक कर रही है। 

सोसायटी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
सेव लाहौल-स्पीति सोसायटी के उपाध्यक्ष विक्रम कटोच ने कहा कि प्रोजेक्ट रद्द करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा गया है। जिला प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां अगर बड़े-बड़े पावर प्रोजेक्ट और बांध बनेंगे तो पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को उठाना पड़ेगा। 

किसी कीमत पर नहीं देंगे एनओसी
गोशाल पंचायत की प्रधान सुशीला राणा ने कहा कि एसजेवीएनएल की ओर से बनाई जा रही 104 मेगावाट की तांदी परियोजना को किसी भी कीमत पर एनओसी नहीं दिया जाएगा। तांदी पंचायत के उपप्रधान वीरेंद्र कुमार ने भी कहा कि एनओसी नहीं दिया जाएगा। ग्राम पंचायत त्रिलोकीनाथ के उप प्रधान बुद्धि चंद ने कहा कि त्रिलोकीनाथ और शकोली पंचायत के अधीन 12 गांव आते हैं। सर्दियों में इन गांवों में भारी बर्फबारी के बाद हिमखंड गिरने का डर रहता है। उन्होंने कहा कि यहां 126 मेगावाट का बरदंग प्रोजेक्ट बनने से पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा।

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