रोहिंग्या बस्तियों में बच्चों का सत्यापन बना चुनौती, संख्या ने खड़ा किया संकट

रोहिंग्या बस्तियों में बच्चों का सत्यापन बना चुनौती, संख्या ने खड़ा किया संकट

जम्मू
रोहिंग्या बस्तियों में सीआईडी का वेरिफिकेशन जारी है। अब तक 30 फीसदी लोगों का ही वेरिफिकेशन हो पाया है। दरअसल, रोहिंग्याओं में बच्चों की तादाद बहुत अधिक है। इनका ब्योरा जुटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि पिछले पांच साल में रोहिंग्या बस्तियों में 2 से 3 हजार बच्चों का जन्म हुआ है।

यहां जन्मे बच्चों का नाम किसी भी सूची में शामिल नहीं है। न ही इनका नाम राशन कार्ड में है और न ही इनके आधार कार्ड हैं। यही कारण है कि एक दंपती का वेरिफिकेशन कन्फर्म करने पर उसके साथ दो से तीन बच्चों के नाम भी सामने आ रहे हैं जिसका कोई रिकार्ड ही नहीं। 

बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जिनके बारे में बताया भी नहीं जा रहा और इनको ढूंढने में परेशानी हो रही है। पिछले एक हफ्ते से पुलिस और सीआईडी की ओर से मिलकर रोहिंग्याओं का वेरिफिकेशन किया जा रहा है लेकिन वेरिफिकेशन काफी धीमी प्रक्रिया से हो रहा है। वेरिफिकेशन करने के लिए बच्चों को ढूंढना और उनके नाम पते कन्फर्म करना पुलिस के सिरदर्दी बन चुका है। 

सूत्रों के अनुसार नरवाल रोहिंग्या बस्ती में कई ऐसे दंपति हैं, जिनके बच्चों का कोई रिकार्ड नहीं। इनका रिकार्ड किस तरह से लिया जाएगा, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। यही कारण है कि कई दंपतियों का वेरिफिकेशन होने के बाद भी इन लोगों को अभी तक होल्डिंग सेंटर नहीं भेजा गया है। जबकि कुछ रोहिंग्या ऐसे हैं, जिनका वेरिफिकेशन करने के बाद उनको वापस बस्तियों में भेजा गया है। 

प्लाट मालिकों पर कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि शहर के और इसके आसपास 30 खाली प्लॉटों पर रोहिंग्याओं को बसाया गया है। इन खाली प्लॉट के मालिक रोहिंग्याओं से हर महीने मोटी कमाई कर रहे हैं। ऐसे प्लॉट मालिकों पर एफआईआर की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अब तक छह से सात लोगों पर इसे लेकर एफआईआर लग चुकी है।

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