राजनेता और खनन माफिया के बीच क्या है संबंध ? पुलिस अफसर पर क्यों बना रहा है दबाव ?

राजनेता और खनन माफिया के बीच क्या है संबंध ? पुलिस अफसर पर क्यों बना रहा है दबाव ?

धर्मशाला
राजनीतिक दलों को अक्सर उनके राजनेता ही अपने निहितार्थों के कारण बदनाम कर देते हैं। सत्ता और पैसे के लोभ में कुछ राजनेता इस हद तक चले जाते हैं कि उन्हें ईमानदार लोग ही रास्ते का कांटा लगने लगते हैं। एसडीएम पालमपुर ने जब वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने से मना कर दिया था तो एक राजनेता ने मुख्यमंत्री से झूठ बोलकर उनको काजा ट्रांसफर कर सजा दे दी थी।

अब एक और राजनेता खनन माफिया को संरक्षण देने के लिए एक बड़े पुलिस अफसर पर लगातार दबाव बना रहा है। इससे तंग आकर पुलिस अफसर ने सरकार से ट्रांसफर मांग ली है। हालांकि भ्रष्टाचार के आरोप के चलते उक्त राजनेता पहले ही सरकार में एक बड़ा ओहदा गंवा चुके हैं।

बड़े पुलिस अफसर ने जब राजनेता को खनन माफिया का संरक्षण करने से मना किया तो खूब हंगामा हो रहा है। खनन माफिया के मामले में राजनेता और बड़े पुलिस अफसर के बीच गहमागहमी इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। पुख्ता आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब दुखी होकर पुलिस अफसर ने सरकार को अपनी ट्रांसफर कांगड़ा जिला से कहीं और करने के लिए निवेदन कर दिया है।

अब माना जा रहा है कि सरकार भी शायद पुलिस अफसर की ट्रांसफर कहीं और कर दे। सवाल यह उठता है कि आखिर राजनेता खनन माफिया के संरक्षण में पुलिस अफसर पर दबाव क्यों बना रहा है। आखिर राजनेता और खनन माफिया के बीच क्या संबंध है जो ईमानदारी पर भारी पड़ रहा। 

राजनीति के चरित्र का चीरहरण होने से दुखी पुलिस अफसर की ईमानदारी और कर्मठता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अफसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुड बुक्स में हैं, जबकि बड़े पुलिस अफसर पर दबाव बनाने वाले एक राजनेता भ्रष्टाचार के आरोप लगने के चलते पहले ही सरकार में अपना एक बड़ा ओहदा गंवा चुके हैं।

मुख्यमंत्री राहत कोष के दुरुपयोग के आरोप भी इन राजनेता पर लगे थे। जब पुलिस अधिकारी से बात करनी चाही तो उन्होंने इस मामले पर संवाद करने से मना कर दिया। अब आगे देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईमानदारी सत्य के पथ पर जीतेगी या कथित अधर्म हमेशा की तरह सच पर हावी हो जाएगा।

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