युक्तिकरण के दावे हवा: कई सरकारें आईं पर शहरों के स्कूलों में डटे शिक्षकों को नहीं हटा पाईं

युक्तिकरण के दावे हवा: कई सरकारें आईं पर शहरों के स्कूलों में डटे शिक्षकों को नहीं हटा पाईं

शिमला
प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। ऐसे में सरकारें भी इनको लेकर सख्ती बरतने से गुरेज करती रही हैं। प्रदेश के जिला मुख्यालयों से सटे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से अधिक शिक्षक हैं।

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हिमाचल प्रदेश में सरकारें बेशक पांच साल बाद बदलती हों लेकिन राजधानी शिमला सहित जिला मुख्यालयों के इर्दगिर्द जमे कई शिक्षक आज तक नहीं बदले जा सके हैं। ऐसे शिक्षकों की संख्या भी बहुत अधिक है जो हर तीन साल बाद सिर्फ दो ही स्कूलों में ऐडजस्टमेंट करवाकर जिला मुख्यालयों के नजदीक टिके हैं। प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। ऐसे में सरकारें भी इनको लेकर सख्ती बरतने से गुरेज करती रही हैं। प्रदेश के जिला मुख्यालयों से सटे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से अधिक शिक्षक हैं। प्रारंभिक कक्षाओं में शिक्षकों के युक्तिकरण करने को लेकर सरकार के सभी दावे हवा साबित हो रहे हैं। कई शिक्षक बीते लंबे समय से सिफारिशों से शहरों में ही टिके हैं। राजधानी शिमला में नेताओं और अफसरों के नजदीकी शिक्षक कई वर्षों से ट्रांसफर नहीं हुए हैं। सूबे में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात का भी सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।

इसके चलते प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों के तबादले ऑनलाइन तरीके से करने के लिए जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही सॉफ्टवेयर बनाने का काम शुरू किया था। शिक्षकों की नाराजगी को देखते हुए यह प्रस्ताव फाइलों में ही सीमित रह गया है। इसका लाभ जिला मुख्यालय में नियुक्त शिक्षक उठा रहे हैं। प्रदेश के मुख्य शहरों में सैकड़ों ऐसे स्कूल हैं जहां शिक्षकों की नियुक्तियां जरूरत से अधिक है। विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात के अनुसार 30 विद्यार्थियों के लिए एक शिक्षक, 60 के लिए तीन शिक्षक, 91 से 120 विद्यार्थियों के लिए चार शिक्षक होने चाहिए। हकीकत में इस अनुपात का पालन नहीं हो रहा है। प्रारंभिक स्कूलों में विद्यार्थियों की जरूरत से अधिक शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं।

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