यदि भारत को समझना है तो गांव का अध्ययन करना आवश्यक : डॉ. गर्ग

यदि भारत को समझना है तो गांव का अध्ययन करना आवश्यक : डॉ. गर्ग

हमीरपुर। ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी में गांव का इतिहास विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अध्यक्ष प्रो. ओम प्रकाश शर्मा ने की।

इस दौरान मुख्य वक्ता डॉ. चेतराम गर्ग ने कहा कि गांव के इतिहास का अर्थ भारत की जड़ों के इतिहास से है। यदि भारत को समझना है तो उसके लिए गांव का अध्ययन करना आवश्यक है। हमें गांव के लोगों को समझाना नहीं है अपितु उन्हें समझना हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति के मूल चिन्ह गांव में है। अत: गांव का इतिहास लेखन का उद्देश्य मूल भारत को समझना है।

प्रो. ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि गांव राष्ट्र के लघुतम प्रतिबिंब हैं। यदि हमें किसी राष्ट्र का दर्शन करना है तो वहां के ग्रामीण परिवेश को समझना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की नीव गांव है। अत: उसका तथ्यात्मक अध्ययन आवश्यक हैं। प्रथम सत्र में प्रो. बीआर ठाकुर ने झोकाडों गांव जिला सिरमौर का शोध प्रारूप प्रस्तुत किया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि भारत को समझने के लिए मूल आधार गांव हैं। अत: गांव के भूगोल, इतिहास, सामाजिक संरचना, आर्थिक संसाधन, धार्मिक आस्थाएं, संस्कृति, वर्तमान स्वरूप पर हिमाचल के बारह जिलों के बारह गांवों का शोधपरक अध्ययन और लेखन किया जा रहा है।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में डॉ. सूरत ठाकुर ने वर्तमान संदर्भ में ग्रामीण एवं क्षेत्रीय इतिहास के अनुसंधानात्मक लेखन पर चर्चा की। कार्यशाला में डॉ. शिव भारद्वाज, डॉ. सूरत ठाकुर, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. रोशनी देवी, प्रो. दामोदर गौतम, विजय सिंह, लकी शर्मा, तिलक राज, महेंद्र सिंह और डॉ. विवेक उपस्थित रहे।

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