मौसम के सटीक पूर्वानुमान के आडे़ आई फॉरेस्ट क्लीयरेंस, तीन जगह लगाए जाने हैं डॉप्लर रडार

मौसम के सटीक पूर्वानुमान के आडे़ आई फॉरेस्ट क्लीयरेंस, तीन जगह लगाए जाने हैं डॉप्लर रडार

शिमला

हिमाचल प्रदेश में मौसम के सटीक पूर्वानुमान के आडे़ फॉरेस्ट क्लीयरेंस आ गई है। प्रदेश में तीन जगह डॉप्लर रडार लगाने की तैयारियों पर ब्रेक लग गई है। डॉप्लर रडार लगाने के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी हो चुका है, लेकिन वन भूमि इस्तेमाल की अभी मंजूरी नहीं मिली है। शिमला से सटे कुफरी के बाद मौसम विज्ञान केंद्र ने चंबा जोत में भी डॉप्लर रडार लगाने की तैयारी की है। इससे चंबा जोत के 150 किलोमीटर के दायरे में हुए मौसम बदलाव की भी सटीक जानकारी मिलेगी। मुरारी देवी सुंदरनगर, किन्नौर और लाहौल में भी डॉप्लर रडार लगाने के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चंबा जोत में डॉप्लर रडार लगाने को सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।

रडार स्थापित करने के लिए उपकरण भी पहुंचा दिए गए हैं। इसके माध्यम से विशिष्ट क्षेत्र में मौसम से संबंधित विभिन्न घटनाओं जैसे आंधी तूफान, बिजली, ओलावृष्टि, बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं के लिए अधिक सटीक पूर्वानुमान और चेतावनी जारी की जा सकेगी। यह केंद्र प्रदेश के बागवानों और किसानों को मौसम से संबंधित सटीक जानकारी देने में मदद करेगा। यह सभी दिशाओं में 150 किलोमीटर के मौसम का डाटा अवलोकन और उपलब्ध करवाएगा। इसका उपयोग पूर्वानुमान के उद्देश्य के लिए किया जाएगा। यह रडार पूरी तरह से स्वचालित होगा और इसकी कार्यप्रणाली कंप्यूटरीकृत कार्यक्रम आधारित होगी। यह विभिन्न डिजिटल प्रारूप और तस्वीरों के रूप में डाटा संचारित करेगा।

डॉप्लर रडार को वन भूमि पर लगाया जाना है। इसके लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस का लेना अनिवार्य है। प्रदेश में वन भूमि का इस्तेमाल करने की मंजूरी के लिए मामले सुप्रीम कोर्ट तक जाते हैं। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया में हो रही देरी से मौसम विज्ञान केंद्र की भविष्य के लिए की जा रही तैयारियां थम गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि डॉप्लर रडार अति सूक्ष्म तरंगों को पकड़ता है। ऐसी तरंगें किसी वस्तु से टकराकर लौटती हैं तो रडार उनकी दिशा आसानी से पहचान लेता है। वायुमंडल में मौजूद पानी की बूंद की स्थिति और दिशा का पता भी इससे लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही रडार लगाने के लिए वन भूमि मिल जाएगी, निर्माण कार्य को शुरू कर दिया जाएगा।

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