मौत से पहले का अंतिम बयान आरोपी को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त, याचिका खारिज : हाईकोर्ट

मौत से पहले का अंतिम बयान आरोपी को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त, याचिका खारिज : हाईकोर्ट

चंडीगढ़
याची ने कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त याची के खिलाफ कोई सबूत या गवाह नहीं है। केवल पीड़िता के बयान के आधार पर याची को दोषी नहीं करार दिया जा सकता।

नाबालिग से दुष्कर्म के बाद उस पर मिट्टी का तेल डाल आग लगाने के दोषी की उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोर्ट संतुष्ट है तो मौत से पहले लिया गया आखिरी बयान भी आरोपी को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त है।

पानीपत निवासी अक्षय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। शिकायत के अनुसार जुलाई 2014 में याची शिकायतकर्ता के घर तब पहुंचा था जब पीड़िता के माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। इस दौरान उसने शिकायतकर्ता की बेटी को अकेला पाकर उससे दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने यह कहा कि वह इस बारे में सभी को बता देगी तो याची ने उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। पीड़िता को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां से उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया।

30 जुलाई को पीड़िता का बयान दर्ज करवाया गया जिसमें उसने घटना की पूरी जानकारी दी। इसके चार दिन बाद पीड़िता की मौत हो गई थी। याची ने कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त याची के खिलाफ कोई सबूत या गवाह नहीं है। केवल पीड़िता के बयान के आधार पर याची को दोषी नहीं करार दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोर्ट को विश्वास है कि अंतिम बयान बिना किसी दबाव दिया गया है तो उस स्थिति में केवल अंतिम बयान के आधार पर दोषी करार दिया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ ही याचिका को खारिज कर दिया।

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