मोदी सरकार का ‘खास बजट’, लगातार तीसरे साल भी हाथ लगी निराशा

मोदी सरकार का ‘खास बजट’, लगातार तीसरे साल भी हाथ लगी निराशा

चंडीगढ़
पंजाब को लगातार तीसरे साल केंद्रीय आम बजट में कुछ भी हासिल नहीं हुआ। सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में आर्थिक, औद्योगिक और ढांचागत विकास की अनेक योजनाओं का एलान किया लेकिन इनमें किसी भी योजना का पंजाब को प्रत्यक्ष लाभ नहीं हो रहा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने वर्ष 2019-20 और वर्ष 2020-21 के आम बजट में भी पंजाब के लिए किसी ढांचागत विकास की योजना का एलान नहीं किया था। बीते साल राज्य सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के लिए केंद्र सरकार से फंड की मांग की थी और नए साल में भी इस मांग को दोहराया था। 

वित्त मंत्री ने न तो पिछले साल और न ही इस साल के बजट में ऐसा कोई प्रावधान किया। पिछले दो साल की तरह ही इस बार भी केंद्र सरकार का बजट किसी भी स्तर पर पंजाब को छू कर नहीं गुजरा। बीते दो आम बजट की तरह ही इस बार भी पंजाब की झोली खाली रही।

सीमावर्ती राज्य होने के कारण लंबे समय से की जा रही विशेष पैकेज की मांग, किसानों की कर्जमाफी योजना में योगदान, पड़ोसी पर्वतीय राज्यों को विशेष पैकेज के कारण पंजाब से उद्योगों के पलायन की भरपाई, राज्य के जल संसाधनों के संरक्षण, प्रदेश के सिर चढ़े भारी कर्ज और बकाया सीसीएल की राशि में केंद्रीय मदद जैसे अहम मुद्दों पर आम बजट पूरी तरह खामोश रहा है। 
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत योजना के अलावा कृषि व किसानों के लिए कई नई घोषणाएं कीं। इनमें मंडियों के डिजिटलाइजेशन और किसानों को कर्ज मुहैया कराने के लिए बजट में इजाफा शामिल है लेकिन पंजाब के किसानों को ऐसी योजनाओं का लाभ पहले भी इस कारण नहीं मिल सका क्योंकि पंजाब में प्रति व्यक्ति आय अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक है, जिससे पंजाब के किसान भी केंद्रीय योजनाओं के लाभ के पात्र नहीं हो पाते।

पिछले साल के बजट में भी केंद्र ने किसानों के लिए 15 लाख के कर्ज का एलान किया था लेकिन पंजाब के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका था। किसानों की आय दोगुनी करने की केंद्रीय योजना का उल्लेख भी बजट में है। इसके अलावा बजट में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने का वादा भी केंद्र सरकार ने किया है।

फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) लागू रखने की घोषणा के साथ ही एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के फंड में कटौती और गोदामों के विनिवेश ने नए बजट में किसानी हितों को लेकर पूरा घालमेल कर दिया है।

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