मशरूम उगाओ, डेढ़ लाख रुपये किलो तक दाम पाओ

मशरूम उगाओ, डेढ़ लाख रुपये किलो तक दाम पाओ

सोलन
क्या आपने कभी ऐसी मशरूम का सेवन किया है, जिसकी कीमत बाजार में एक से दो लाख रुपये प्रतिकिलो तक हो। जी हां! इतनी महंगी मशरूम औषधीय गुणों से भरपूर है। स्टेमिना और इम्यून सिस्टम मजबूत रखने व दवाई के तौर पर इस्तेमाल होने वाली इस मशरूम का भारत के एकमात्र खुंब अनुसंधान केंद्र सोलन में चल रहा शोध पूरा हो गया है। स्टेमिना और इम्यूनिटी समेत रेस्पेरेट्री सिस्टम पर काम करने वाली कॉर्डिसेप्स मिलिटेयर्स मशरूम को यहां के वैज्ञानिकों ने लैब में तैयार कर बड़ी सफलता हासिल की है। 

दिमागी नसों को ताकत देने वाली हिरेशियम मशरूम के सफल परीक्षण के बाद अब वैज्ञानिकों ने ऐसी मशरूम तैयार करने में सफलता हासिल की है, जो स्टेमिना बूस्ट करने के साथ-साथ आपके श्वसन तंत्र को मजबूत करेगी। औषधीय गुणों से भरपूर इस मशरूम (ड्राई) के दाम जहां डीएमआर सोलन में 1 लाख रुपये प्रति किलो तक रखे गए हैं, वहीं बाजार में यह मशरूम डेढ़ से दो लाख रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकती है।

बाकायदा देश के करीब अस्सी किसानों को इसे तैयार करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। खुंभ अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि औषधीय गुणों से भरपूर यह मशरूम डीएमआर सोलन में तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि इसे भूर चावालों के ऊपर तैयार किया जाता है। किसान बहुत कम जमीन पर इसका उत्पादन कर अपनी आर्थिकी बदल सकते हैं। इसमें मौजूद कार्डिशेपन एक प्राकृतिक स्टेमिना एनहेंसर है। इसके अलावा यह सांस के गंभीर रोगों के लिए भी लाभदायक है। 

चीन में होता है उत्पादन, एथलीट करते हैं इस्तेमाल
स्टेमिना एनहेंसर के रूप में इस्तेमाल होने वाली कॉर्डिसेप्स मिलिटेयर्स मशरूम का चीन में बहुतायत में उत्पादन होता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं समेत ओलंपिक आदि की तैयारी करने वाले चीन के एथलीट इसका सेवन करते हैं। खुंब अनुसंधान केंद्र सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि अब भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से इस क्षेत्र में क्रांति आने की उम्मीद है।

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