बजट सत्र : निजी हमलों में उलझी अभिभाषण पर चर्चा, भाजपा विधायक का विरोध, नहीं दिया बोलने

निजी हमलों में उलझी अभिभाषण पर चर्चा, भाजपा विधायक का विरोध, नहीं दिया बोलने

चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का ज्यादातर समय विधायकों की परस्पर निजी टिप्पणियों और अभद्र शब्दावली की भेंट चढ़ा। सदन में कुछ गिने-चुने सदस्यों ने ही राज्यपाल के अभिभाषण के बिंदुओं पर स्पष्ट तौर पर अपने विचार रखे। अन्यथा अधिकांश सदस्यों ने दूसरों दलों को किसानी मुद्दे, पिछली सरकार की नाकामियां गिनाने, केंद्र की भाजपा सरकार का साथ देने आदि आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन पर टिप्पणियों में ही समय बिताया।

सदन में कांग्रेस विधायक हरमिंदर सिंह गिल और अकाली विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया के बीच मंगलवार को हुई बहस, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, का विवाद बुधवार को अभिभाषण पर चर्चा शुरू होते ही फिर से चर्चा में आ गया, जब हरमिंदर सिंह ने मंगलवार को मजीठिया द्वारा लगाए गए आरोप पर सफाई की मांग की। इस पर दोनों सदस्यों के बीच फिर से तीखे हमले शुरू हुए, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने सख्ती से हस्तक्षेप करते हुए न सिर्फ दोनों सदस्यों को शांत किया, बल्कि दोनों के वाकयुद्ध को सदन की कार्यवाही से हटाने के निर्देश भी दिए।

इसके बाद अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के कुशलदीप सिंह ढिल्लों द्वारा की गई टिप्पणियों से आम आदमी पार्टी के सदस्य भड़क गए और ऐतराज जताते हुए वेल में पहुंच गए। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने यह मामला शांत करने का प्रयास लिया लेकिन एक तरफ कुशलदीप अपने बयान को दोहराते रहे, वहीं आप के हरपाल चीमा ने यहां तक कहा कि कांग्रेसी निजी टिप्पणियां कर रहे हैं, वह भी राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बीच। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही सरकार की उपलब्धि है।

इन मामलों के अलावा अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा, बिक्रम सिंह मजीठिया, पवन कुमार टीनू, डॉ. सुखविंदर कुमार, शरणजीत सिंह ढिल्लों, गुरमीत सिंह मीत हेयर, एनके शर्मा द्वारा दूसरे सदस्यों और सरकार पर की गई अभद्र टिप्पणियों के कारण सदन में बार-बार बहस का माहौल बनता रहा। 

विधानसभा अध्यक्ष ने भी इन सदस्यों द्वारा की गई अनेक टिप्पणियों को कार्यवाही से हटा दिया। इस बीच कुछ सदस्यों ने राज्यपाल के अभिभाषण पर क्रमवार अपने विचार रखे। इनमें आम आदमी पार्टी की रूपिंदर कौर रूबी और अमन अरोड़ा शामिल रहे। रूबी ने कर्मचारियों और बेरोजगारों का मुद्दा उठाया।

अभिभाषण पर गिनाई गई उपलब्धियों को उन्होंने क्रमवार खारिज करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। आप विधायक अमन अरोड़ा तो बीते तीन साल के राज्यपाल के अभिभाषणों की प्रतियां साथ लेकर सदन में पहुंचे थे। उन्होंने सभी अभिभाषणों में सरकार की उपलब्धियों के आंकड़ों के विरोधाभास सदन में रखते हुए सरकार की उपलब्धियों को नाकाफी करार दिया।

अभिभाषण पर भाजपा विधायक को नहीं बोलने दिया 
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भाजपा के विधायक अरुण नारंग को बाकी दलों के सदस्यों ने बोलने नहीं दिया। सदस्यों का कहना था कि भाजपा विधायक सबसे पहले संघर्ष कर रहे किसानों के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें, तभी उन्हें राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सदन में अरुण नारंग जैसे ही अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए, कांग्रेस विधायक दलवीर सिंह गोल्डी ने उनका विरोध शुरू कर दिया। गोल्डी ने सदन में कहा कि पंजाब के किसान चार महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं और भाजपा उनका विरोध कर रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा के सदस्य सदन में पहले किसानों के मसले पर अपना स्टैंड स्पष्ट करें, तभी उन्हें अभिभाषण पर बोलने की अनुमति दी जाए। गोल्डी की इस मांग का समर्थन सदन में बैठे कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने भी किया और अपनी बेंचों से खड़े होकर नारंग का विरोध करने लगे। 

इस दौरान नारंग ने अपनी बात कहना जारी रखा तो अकाली दल के सदस्य भी कांग्रेस के साथ उनके विरोध में खड़े हो गए। वहीं, अकाली दल के सदस्य वेल में पहुंच गए और भाजपा सदस्य को नहीं बोलने देने की मांग करने लगे। तब अकाली दल के सदस्यों का आम आदमी पार्टी के विधायकों ने भी साथ दिया और अपनी बेंचों पर खड़े होकर कांग्रेस व अकाली सदस्यों के सुर में सुर मिलाने लगे। 

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