पानी नहीं ‘जहर’ उगल रहे हैंडपंप !

शाहतलाई (बिलासपुर)। आईपीएच विभाग के हैंडपंप नकारा साबित हो रहे हैं। हैंडपंप लगाने में अनियमितता बरती गई है या फिर उचित रख रखाव नहीं हो रहा। हैंडपंपों से निकल रहा मिट्टी युक्त लाल रंग के ‘जहरीले’ पानी से विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठने लगे हैं। दूषित पानी पीने से लोग बीमारियां फैलने को लेकर आशंकित है। मामला झंडूता विकास खंड के नघ्यार गांव का है। यहां लगे छह हैंडपंपों में से पांच में मिट्टी वाला पानी आ रहा है। जो पीने तो दूर कपड़े धोने आदि के भी लायक नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ गई है। पेयजल के लिए ग्रामीण दर-दर ठोकरें खाने को विवश हो गए हैं।
नघ्यार गांव की आबादी लगभग 1500 है। इनके लिए गांव में छह हैंडपंप लगाए गए हैं। लेकिन, अब पांच हैंडपंपों से लाल रंग का मिट्टी युक्त पानी आ रहा है। अधिकतर परिवार इन्हीं हैंडपंपों पर निर्भर है। लोगों का कहना है कि अभी तो सर्दी का मौसम है। गर्मी में तो यह समस्या और विकराल हो सकती है। लिहाजा, समय रहते आईपीएच को इनकी मरम्मत करनी चाहिए। ग्रामीण जगदीश भारद्वाज, उत्तम चंद, बर्फी राम, राज कुमार, नीलम कुमारी, ब्रह्मी देवी, रेखा कुमारी, अशोक कुमार, आशा देवी, अनु भारद्वाज, दीप कुमार, लीला देवी, प्रकाश चंद, ब्रह्म दास, प्रेम चंद, संदीप कुमार ने बताया कि आईपीएच विभाग ने कुछ साल पहले यह हैंडपंप लगाए हैं। अब अचानक इनसे लाल रंग का मिट्टी युक्त पानी निकलने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस बारे विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करवा दिया गया है, मगर कोई हल नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि हैंडपंप खराब हो गए हैं। इनकी सफाई की जानी है। जंग खाने के कारण ही यह समस्या पेश आ रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी समस्या का समाधान नहंी किया गया तो वह सड़कों पर उतरने के लिए विवश हो जाएंगे। उधर, कलोल में तैनात आईपीएच के सहायक अभियंता डीआर भाटिया ने कहा कि हैंडपंपों की मरम्मत करने को कर्मचारी भेजे थे, लेकिन उनकी सफाई होनी है। इसके लिए विभाग शीघ्र गाड़ी भेज रहा है।

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