नौणी विश्वविद्यालय तैयार करेगा 11 और स्वदेशी एंटी हेलगन

नौणी विश्वविद्यालय तैयार करेगा 11 और स्वदेशी एंटी हेलगन

सोलन
नौणी विश्वविद्यालय 11 और स्वदेशी एंटी हेलगन बनाएगा। बजट के लिए इसका प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा गया है। कृषि विकास केंद्र (केवीके) सोलन में पहली स्वदेशी एंटी हेलगन का अभ्यास सफल रहा है।

नौणी विश्वविद्यालय 11 और स्वदेशी एंटी हेलगन बनाएगा। बजट के लिए इसका प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा गया है। कृषि विकास केंद्र (केवीके) सोलन में पहली स्वदेशी एंटी हेलगन का अभ्यास सफल रहा है। इस हेलगन को अब ऊंचाई वाले क्षेत्र जुब्बल में शिफ्ट किया जाएगा। यहां ओलावृष्टि को रोकने पर ट्रायल किया जाएगा। सफलता मिलने के बाद इसे बाजार में उतारा जाएगा। दरअसल, हाल ही में नौणी विश्वविद्यालय ने आईआईटी मुंबई के साथ मिलकर मिसाइल और लड़ाकू विमान की तकनीक की तर्ज पर पहली स्वदेशी एंटी हेलगन तैयार की है।

स्वदेशी एंटी हेलगन में हवाई जहाज के गैस टरबाइन इंजन और मिसाइल के रॉकेट इंजन की तर्ज पर इस तकनीक में प्लस डेटोनेशन इंजन का इस्तेमाल किया गया है। इसमें एलपीजी और हवा के मिश्रण को हल्के विस्फोट के साथ दागा जाता है। इस विस्फोट से एक शॉक वेव (आघात तरंग) तैयार होती है। यह शॉक वेव एंटी हेलगन के माध्यम से वायुमंडल में जाती है और बादलों के अंदर का तापमान बढ़ा देती है। इससे ओला बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। मध्यम ऊंचाई वाले सोलन के बाद अब ऊंचाई वाले क्षेत्र जुब्बल में इसका ट्रायल किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि ओलावृष्टि से फसल को बचाने में यह स्वदेशी एंटी हेलगन कितनी कारगर है।

एक हेलगन पर दस लाख का खर्च
नौणी विवि के पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके भारद्वाज ने बताया कि गन को लगाने समेत इस तकनीक का शुरुआती खर्च करीब दस लाख रुपये है। बाद में एलपीजी गैस पर ही खर्च होगा। प्रदेश के अन्य जिलों में इस गन का ट्रायल किया जाएगा, जिसके लिए 11 और नई हेलगन को तैयार किया जाएगा। प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

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