दिल्ली में रहने वाले अफगानी नागरिक अपने परिवार-दोस्तों को लेकर चिंतित

दिल्ली में रहने वाले अफगानी नागरिक अपने परिवार-दोस्तों को लेकर चिंतित

नई दिल्ली
तालिबान का अफगानिस्तान पर कहर जारी है। कई प्रमुख राजधानियों में अपना झंडा लहरा चुका है। इस बीच दिल्ली के लाजपत नगर में रहने वाले अफगानिस्तान के नागरिकों का दर्द छलका है। तालिबान के काबुल में घुसते ही उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के प्रति चिंता जाहिर की है। 

लाजपत नगर के एक दुकान के मालिक अहमद ने बताया कि अफगानिस्तान में हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में रह रहे अपने परिवारों की चिंता सता रही है। अल्लाह सुरक्षित रखे।

वहीं दिल्ली में रहने वाले अफगानी नागरिक नदीम ने बताया कि वे यहां दिसंबर 2015 में आए थे। उन्होंने कहा कि तालिबान ने अफगानिस्तान के ज्यादातर प्रांतों पर कब्जा कर लिया है। मेरे परिवार ने सुबह मुझे बताया कि काबुल में कोई गोलीबारी नहीं हुई है। 
 
इससे पहले लाजपत नगर में ही रहने वाले अफगानी नागिरक हसीबुल्लाह सिद्दीकी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा था कि उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा है कि अफगानिस्तान में रह रहे उनके माता-पिता और भाई कहां हैं। पिछले चार साल से भारत में रह रहे हसीबुल्लाह ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता और भाई से 3-4 महीने से बात नहीं की। उनके ठिकानों से अनजान है। आगे कहा कि उसके माता-पिता एक गांव में रहते हैं और वहां नेटवर्क कनेक्टिविटी खराब है। 

हसीबुल्लाह ने कहा कि अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है। मुझे बताया गया है कि तालिबान युवाओं का अपहरण कर रहा है और उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा है। वहां की युवतियों से शादी करा रहा है और उन्हें हिजाब पहनने के लिए मजबूर कर रहा है। लड़कियां अब वहां खुलकर नहीं घूम सकती हैं। 

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा लगभग तय
बता दें कि अफगानिस्तान पर अब तालिबान का कब्जा लगभग तय हो चुका है। सत्ता हस्तांतरण की प्रकिया भी शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, नई अंतरिम सरकार के अंतरिम प्रमुख के रूप में अली अहमद जलाली का नाम सबसे आगे चल रहा है। तालिबान को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए अफगान राष्ट्रपति भवन एआरजी में में बातचीत चल रही है। खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने बताया कि राष्ट्रीय सुलह के लिए उच्च परिषद के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला इस प्रक्रिया में मध्यस्थता कर रहे हैं।

इस बीच, आंतरिक और विदेश मामलों के कार्यवाहक मंत्रियों अब्दुल सत्तार मिर्जाकवाल ने अलग-अलग वीडियो क्लिप में आश्वासन दिया कि काबुल के लोगों को सुरक्षित किया जाएगा, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ शहर की रक्षा कर रहे हैं। टोलो न्यूज के मुताबिक, मिर्जकवाल ने कहा कि काबुल पर हमला नहीं होगा, सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्वक ढंग से होगा। काबुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिक्योरिटी फोर्स की है।  

ताजा जानकारी के अनुसार, तालिबान ने अफगानिस्तान पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। तालिबान के आतंकी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में प्रवेश कर गए हैं और देश की सभी सीमाओं पर कब्जा भी कर लिया है। इस बात की पुष्टि तीन अफगान अधिकारियों ने की है। तालिबान के आतंकी काबुल के कलाकान, काराबाग और पगमान जिलों में प्रवेश कर लोगों में दहशत बनाना शुरू कर दिया है। इस बीच तालिबान ने काबुल की बगराम जेल के बाद पुल-ए-चरखी जेल को भी तोड़ दिया है। उसने वहां से हजारों कैदियों को भी आजाद कर दिया है। पुल-ए-चरखी अफगानिस्तान की सबसे बड़ी जेल है। यहां ज्यादातर तालिबान के लड़ाके बंद थे।

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