चुनाव : आज आ सकती है उत्तराखंड कांग्रेस की पहली सूची

आज आ सकती है उत्तराखंड कांग्रेस की पहली सूची

देहरादून
कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी ने उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर सहमति बनाकर संभावित उम्मीदवारों का पैनल तय कर लिया है। शनिवार को होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की वर्चुअल बैठक में नामों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। पार्टी फिलहाल 40 नामों की ही घोषणा करने जा रही है। सूत्र बताते हैं कि ऐसा रणनीति के तहत किया जा रहा है, ताकि टिकट मिलने के बाद किसी के पाला बदलने से फजीहत न हो। कुछ सीटों पर पार्टी अब भी किसी के आने का इंतजार कर रही है।

किसी नई सीट से लड़ने की मंशा जता चुके हैं रावत
चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने अब भी स्क्रीनिंग समिति के सामने अपनी सीट का खुलासा नहीं किया है। रावत ने समिति के अध्यक्ष अविनाश पांडेय और प्रभारी देवेंद्र यादव से नेतृत्व से पूछकर फैसला लेने का आग्रह किया है कि वे खुद चुनाव लड़ें या लड़ाएं। बताते हैं कि ऐसा इसलिए, क्योंकि रावत किसी नई सीट से लड़ने की मंशा जता चुके हैं। नई सीट पर उन्हें ज्यादा समय देना पड़ेगा। स्क्रीनिंग समिति ने लगभग 50 सीटों पर सिंगल नाम तय किए हैं। हालांकि इन सीटों के अन्य प्रमुख दावेदारों के नाम भी सीईसी को साथ में भेजे जा रहे हैं।

एक परिवार एक सीट का फार्मूला
कांग्रेस नेतृत्व ने एक परिवार एक सीट का फार्मूला उत्तराखंड में भी लागू किया है, लेकिन भाजपा से लौटे आर्य परिवार की दोनों सीटें वर्तमान विधायक के नाते पक्की मानी जा रही हैं। ऐसे में हरीश रावत लड़ेंगे तो बेटे आनंद और बेटी अनुपमा का टिकट फंस जाएगा। किशोर उपाध्याय पर भी नेताओं की अलग-अलग राय है। लिहाजा उन पर भी फैसला नेतृत्व को लेना है।

सीटिंग विधायकों का नाम पहली सूची में
स्क्रीनिंग कमेटी के बाद कांग्रेस ने राज्य की 70 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार पहली सूची में सीटिंग विधायकों के अलावा पिछले चुनाव में एक या दो हजार वोट के अंतर से हारे नेताओं का नाम शामिल रहेगा। इसके गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, संजीव आर्य समेत कुछ नाम ऐसे हैं, जिन पर किसी को कोई संशय नहीं है। इस सूची में उन नेताओं का नाम भी शामिल हो सकता है, जो बुरे दौर में भी पार्टी के साथ मजबूती के साथ खड़े रहे। इनमें कई पूर्व विधायकों और मंत्रियों का नाम शामिल है।

स्क्रीनिंग कमेटी की अब तक तीन बैठकें हो चुकी हैं, जो बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई हैं। राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से अधिकांश सीटों पर एक उम्मीदवार और कुछ सीटों पर दो उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर लिया गया है। जिसे शनिवार को सीईसी के सामने रखा जाएगा। शनिवार देर शाम तक पहली लिस्ट आ सकती है।
– गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

हरीश रावत के चुनाव लड़ने को लेकर संशय बरकार
प्रदेश में आचार संहिता लगने और चुनाव की तिथि तय होने के बाद अगर किसी बात की सबसे अधिक चर्चा है तो वह यह है कि हरीश रावत कहां से चुनाव लड़ेंगे। हरीश चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं? इधर, उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए है तो आखिरी फैसला कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (सीईसी) पर भी छोड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि वह खुद चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभालते हुए अपने पुत्र या पुत्री के लिए टिकट मांग सकते हैं। दूसरी तरफ उनके कुमाऊं से डीडीहाट सीट से चुनाव लड़ने की भी चर्चाएं हैं।

माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कुमाऊं की डीडीहाट सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। हरीश रावत को पिथौरागढ़ से चुनाव मैदान में उतारने का प्रस्ताव कांग्रेस नेताओं की एक बैठक के बाद कांग्रेस हाईकमान को भेजा गया था। यहां से कांग्रेस पिछले 25 वर्षों से चुनाव नहीं जीती है। इस सीट पर पिछले चार विधानसभा चुनाव में भाजपा के बिशन सिंह चुफाल चुनाव जीतते रहे हैं। चुफाल वर्तमान में पेयजल मंत्री हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि हरीश रावत की ओर से अभी तक इस बारे में कोई भी बयान सामने नहीं है।

हरीश रावत स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहने के लिए नहीं जाने जाते हैं। लेकिन पिछले दिनों उन्होंने स्पष्ट शब्दों में एक बात जरूर कही, कि वह अपने पुत्र और पुत्री से कहेंगे की वह भी ऐसी सीटों का चयन करें, जहां कांग्रेस लंबे समय से चुनाव नहीं जीती है या पार्टी वहां कमजोर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि खुद वह अपने लिए भी यही मापदंड रखते हैं। इसके बाद ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि वह अपने बच्चों को टिकट दिलाना चाहते हैं। हरीश रावत के बेटे आनंद रावत और बेटी अनुपमा रावत कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। जबकि पार्टी में महिला कांग्रेस की ओर से अनुपमा रावत को हरीद्वार की किसी सीट से उतारे जाने की मांग भी उठ चुकी है। ऐसे में हरीद्वार ग्रामीण वह सीट हो सकती है, जिससे अनुपमा रावत को उतारा जा सकता है। जबकि आनंद रावत को सल्ट से उतारे जाने की बात चल रही है।

उत्तराखंड में हरीश रावत चुनाव अभियान समिति की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में उनका पहला लक्ष्य पार्टी को जीत दिलाना हैं। फिलहाल उनके पास कैंपेन करने वाले नेताओं की कमी है। राष्ट्रीय नेताओं की अगर बात करें तो सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से रैली इत्यादि से दूर ही हैं। राहुल गांधी के पास उत्तराखंड के अलावा चार अन्य राज्यों की भी जिम्मेदारी है। प्रियंका गांधी के कंधों पर यूपी की जिम्मेदारी हैं। ऐसे में उत्तराखंड में %लोकल कनेक्ट% के नाम पर हरीश रावत ही बड़ा चेहरा हैं।

कांग्रेस को लग सकता है नैनीताल में बड़ा झटका
कांग्रेस पार्टी में पहली सूची जारी होने से पहले ही नैनीताल में पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। इस सीट से दावेदारी पेश कर रही पूर्व विधायक और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार देर रात उनकी भाजपा नेताओं से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक मौजूद थे।

शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे डालनवाला स्थित भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के फ्लैट में यह मुलाकात करीब एक घंटे चली। बताया जा रहा है कि भाजपा सरिता आर्य को नैनीताल विधानसभा सीट से प्रत्याशी बना सकती है। सरिता कांग्रेस से टिकट की दावेदारी पेश कर चुकी हैं, लेकिन इस सीट पर विधायक रहे संजीव आर्य को पार्टी हाईकमान पहले ही प्रत्याशी बनाने का वादा कर चुका है। संजीव के पार्टी में आने के बाद से ही सरिता आर्य के तेवर तल्ख हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें मनाने के प्रयास किए, लेकिन वह टिकट से इतर कुछ भी मानने को तैयार नहीं है। बताते चलें कि सरिता आर्य वर्ष 2012 के चुनाव में विधायक बनीं थीं। जबकि वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में सरिता प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं।

डालनवाला स्थित जिस बिल्डिंग की बात कही जा रही है, उसमें दूसरे लोग भी रहते हैं। मैं फ्लैट संख्या 27 में शुक्रवार रात अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। कांग्रेस पार्टी छोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है। मुझे तो बाद में पता चला, इस बिल्डिंग में भाजपा के कोई नेता भी रहते हैं।
– सरिता आर्य, पूर्व विधायक और प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष

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