ग्राम सेवा सहकारी सभा सीमित में आठ करोड़ का घोटाला, विजिलेंस ब्यूरो ने की एफआईआर दर्ज

ग्राम सेवा सहकारी सभा सीमित में आठ करोड़ का घोटाला, विजिलेंस ब्यूरो ने की एफआईआर दर्ज

शिमला
बिलासपुर की दी तलाई ग्राम सहकारी सभा के बाद अब पपलाह की दी करलोटी ग्राम सेवा सहकारी सभा सीमित में आठ करोड़ का घोटाला सामने आया है। विजिलेंस ब्यूरो को प्रारंभिक जांच में कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। मुख्य आरोपी तत्कालीन सचिव की 2018 में मौत हो चुकी है। ब्यूरो ने तत्कालीन सचिव की पत्नी, सभा के सहायक सचिव व दो पूर्व ऑडिटर समेत कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

ब्यूरो को मुख्यमंत्री सेवा संकल्प के जरिये मिली शिकायत में सभा में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। प्रारंभिक जांच और पूर्व ऑडिटर देवराज डोगरा से साल 2016-17 और 2017-18 का एक साथ ऑडिट कराया तो घपले की जानकारी मिली। इसके बाद पता चला कि तत्कालीन सचिव शशि कुमार ने राज्य सहकारी बैंक शाखा गुग्गा मोहड़ा की 18 फर्जी एफडीआर बनाई और बिना प्रस्ताव बनाए उनकी अलग-अलग तिथियों में सभा के इंद्राज में एंट्री कर दी।
पहली फर्जी एफडीआर 25 मई 2009 की थी। अंतिम जाली एफडीआर 20 अप्रैल, 2015 को दाखिल की गई। इन एफडीआर की परिपक्वता दर्शाकर पांच करोड़ 32 लाख से ज्यादा का गबन कर दिया। शशि ने बिना किसी नियम या प्रक्रिया को अपनाए सभा से लोन अगेंस्ट डिपॉजिट दर्शाकर चालीस लाख अपनी पत्नी रीता देवी के खाते में जमा करा दिए।
कई बार पत्नी रीता देवी के खाते में भारी रकम जमा हुई। इस काम में सहायक सचिव सुनील कुमार की भी भूमिका संदेह के घेरे में पाई गई। जांच में पता चला कि दी तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा सीमित से भी शशि ने सुनील कुमार के साथ मिलकर तीन एफडीआर परिपक्व होने पर 51.11 लाख लाने और अपनी सभा के दस्तावेजों में एंट्री करने के बाद उसे राज्य सहकारी बैंक की शाखा गुग्गा मोहड़ा में साठ लाख की एफडीआर कराना दर्शाया गया।

ये एफडीआर भी फर्जी निकलीं। 13 अगस्त, 2018 को शशि की मौत के बाद भी फर्जीवाड़े को अंजाम देकर और राशि का भी हेरफेर किया गया है। इस फर्जीवाड़े को रोकने का जिम्मा जिन ऑडिटर धर्मपाल, देवराज डोगरा और शादी लाल पर था, वो भी इसे किसी भी ऑडिट में नहीं पकड़ सके। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई।

 

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