गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू में नहीं हैं बेड, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन बेबस

गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू में  नहीं हैं बेड, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन बेबस

धर्मशाला
ऑक्सीजन बेड और दवाओं के संकट से थोड़ा बहुत उभरने के बाद अब जिला कांगड़ा में इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) बेड का अकाल पड़ गया है। शनिवार को पूरे जिले में गंभीर मरीजों के लिए एक भी आईसीयू बेड नहीं बचा था। टांडा अस्पताल प्रशासन, जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अब इस गंभीर स्थिति के समक्ष खुद को बेबस महसूस कर रहा है। वर्तमान में पूरे जिले में कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज करने के लिए सिर्फ 40 आईसीयू बेड हैं। ये बेड सिर्फ टांडा अस्पताल में हैं। इसके अलावा किसी अस्पताल में आईसीयू बेड नहीं हैं। निजी अस्पतालों में भी सिर्फ तीन में ही आईसीयू बेड हैं। इनकी संख्या करीब 12 है। 

सूत्रों के अनुसार कम दाम के चलते ये तीन निजी अस्पताल अपने आईसीयू बेड सरकार को नहीं देंगे। इन्होंने अपने आधे बेड सिर्फ ऑक्सीजन वाले ही तैयार किए हैं। इसलिए, प्रशासन अब कोरोना के गंभीर रोगियों को लेकर परेशान हो गया है। शनिवार को टांडा अस्पताल में सभी आईसीयू बेड भर गए। सुबह से जब और गंभीर मरीज टांडा अस्पताल भेजे जाने लगे तो सबके हाथ खड़े हो गए। कांगड़ा में रोजाना 500 से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। 10 से ज्यादा रोजाना कोरोना मरीज मर रहे हैं। ऐसे में स्थिति विकराल होती जा रही है।  

टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. भानु अवस्थी ने कहा कि अस्पताल में सभी आईसीयू बेड भर चुके हैं, जबकि लोग अभी भी लापरवाही करने से बाज नहीं आ रहे हैं। सीएमओ कांगड़ा जीडी गुप्ता ने बताया कि विभाग मरीजों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। कई विकल्प तलाशे जा रहे हैं। डीसी राकेश प्रजापति ने कहा कि कांगड़ा जिले में कुल 40 आईसीयू बेड हैं, जो भर गए हैं। इस मुश्किल वक्त में लोगों के सहयोग की बहुत जरूरत है। 

ऑक्सीजन वाले बेड की नहीं है किल्लत
ऑक्सीजन वाले बेड की किल्लत अब कांगड़ा जिले में नहीं है। शनिवार तक प्रशासन ने 665 ऑक्सीजन बेड का पूरे जिले में इंतजाम कर लिया था। ऑक्सीजन का भी प्रशासन ने पर्याप्त मात्रा में इंतजाम कर लिया है। 

लोग हैं कि मान नहीं रहे
डीसी कांगड़ा की मानें तो कई लोग अपनी जान से खिलवाड़ करने को आमादा हैं। शादियों के आयोजक उन्हें अभी भी फोन कर रहे हैं कि आयोजन में मेहमानों की संख्या बढ़ा दो। लोग अभी भी महामारी की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं।

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