क्या किसी अनहोनी के इंतजार में है सरकार

गुणैशी (कुल्लू)। बाढ़ से तेरह वर्ष पहले मिले जख्मों को सरकारें अभी तक नहीं धो पाईं। राजनीतिक दलों की इस उपेक्षा का जीता जागता उदाहरण है तीर्थनघाटी का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल गुशैणी । इस पाठशाला में 526 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। बच्चों को हर रोज पलाहचन खड्ड पर बने जर्जर हो चुके पुल से स्कूल जाना पड़ता है। यह पुल झूले की तरह झूलता है। हादसों की आशंका भी भरपूर है। एक बार बच्चा इस पुल से गिर भी चुका है। बावजूद इसके न तो प्रशासन की नींद खुली न ही किसी राजनीतिक दल ने कोई प्रयास किए। अभी भी स्कूली बच्चे इसी पुल से गुजरते हैं। बच्चों की हिफाजत के प्रति चिंतित शिक्षक हर रोज पुल के दोनों ओर खड़े होकर छात्रों को पुल आरपार करवाते हैं।
खड्ड पर बना यह जर्जर पुल आदमी के चलने पर झूले की तरह झूलता है। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों का कहना है कि कुछ महीने पहले एक बच्चा पुल से गिरकर घायल हो चुका है। अब पुल के दोनों ओर दो-दो शिक्षक खड़े कर बच्चों को पुल पार करवाते हैं। आधी छुट्टी के दौरान भी पुल के दोनों ओर अध्यापक खड़े रहते हैं।
लोगों का कहना है कि वर्ष 2005 में आई बाढ़ में स्कूल का भवन और खेल का मैदान पूरी तरह से बह गया। अब स्कूल के पास भवन की उचित व्यवस्था नहीं है। मैदान खड्ड के बीच में बना है। यह पूरी तरह से पत्थरों से भरा पड़ा है। स्थानीय लोगों ताराचंद, खेम सिंह, अमित कुमार, अनिल, हरिश, भूपेंद्र, ज्ञानचंद, चांद किशोर, भगवान दास, राज टेलर, सुरज मणी, मानदास, हरी सिंह, केशव राम, प्रदीप कुमार, धनेश्वर और सतीश ने प्रदेश सरकार से यहां पर शीघ्र नया पुल बनाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्कूल में स्टाफ की कमी से भी बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
प्रधानाचार्य जगदीश शर्मा ने बताया कि पुल के दोनों ओर दो-दो शिक्षक तैनात करने की व्यवस्था की है। ताकि कोई हादसा न हो। खेल मैदान और स्टाफ की कमी बारे उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है।

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