किसान संग्रहालय में रखेंगे लग्जरी ट्रॉलियां व झोपड़ियां, ऐतिहासिक जीत की कहानी बच्चों को सुनाएंगे

किसान संग्रहालय में रखेंगे लग्जरी ट्रॉलियां व झोपड़ियां, ऐतिहासिक जीत की कहानी बच्चों को सुनाएंगे

सोनीपत (हरियाणा)

सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर 378 दिन तक चले किसान आंदोलन में किसानों के बाद अगर किसी चीज की चर्चा रही तो उनमें खास रहीं उनकी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां। आंदोलन की शुरुआत में बख्तरबंद ट्रालियां ही किसान का आशियाना बनी। सर्दी में जहां पराली व गर्म कपड़ों के बीच किसान के लिए ट्रॉली ने रसोई व बेडरूम की दोहरी भूमिका निभाई, वहीं सर्दी में यह ट्रॉलियां लग्जरी रूम बन गई।

हालांकि बाद में तंबू व झोपड़ियों का सहारा लिया गया, लेकिन ट्रॉलियों की भूमिका कम नहीं हुई। किसानों ने शुरुआत में इनमें गर्म कपड़ों के साथ एलसीडी व टीवी लगाकर दुनियाभर की गतिविधियों पर नजर रखी। किसानों ने अपनी ट्रॉलियों पर लोहे के बड़े एंगल लगाकर उन्हें कमरे का रूप दे दिया था। गर्मी में ट्रॉलियों के अंदर एसी तक लगा लिए थे। बाद में किसानों ने जब झोपड़ियों का निर्माण किया तो उनमें भी जबरदस्त कलाकारी दिखी और यह झोपड़ियां देशभर में आकर्षण का केंद्र बन गई। 

अब आंदोलन खत्म होने के साथ ही किसानों ने तय किया है कि वह अपनी इन ट्रॉलियों को किसान आंदोलन के संघर्ष का प्रतीक बनाएंगे। गांव में जाकर किसान ट्रॉलियों को संग्रहालय या पंचायत घर में खड़ा करेंगे, जहां पर बच्चे व ग्रामीण इन ट्रॉलियों से अंदाजा लगा सकेंगे की किसान आंदोलन में किस तरह से जुगाड़ के सहारे जीवन बिताकर भी किसान डटे रहे।
 
वहीं, किसानों ने तय किया है जो झोपड़ियां बेहद आकर्षक बनाई थी, उन्हें भी गांव में ले जाया जाएगा और इन्हें प्रदर्शनी के रूप में रखा जाएगा। किसानों का कहना है कि एक साल के दौरान उन्हें कुछ लोगों ने कई तरह से मदद पहुंचाई और इस्तेमाल का सामान भी दिया। यह सामान भी किसान अपने गांवों में संघर्ष की निशानी के रूप में रखेंगे।
 
गुरुद्वारों में रखे अपनी झोपड़ियां
आंदोलन के दौरान किसानों ने जो झोपड़ियां स्वयं बनाई थी, उन्हें गांवों के गुरुद्वारों में भी रखे जाने पर विचार किया जा रहा है। जिला फिरोजपुर के गांव बुलामबतरा निवासी रणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर झोपड़ी का निर्माण किया था, जिसके लिए आसपास के ग्रामीणों से भी मदद मांगी गई थी। अब यह झोपड़ी वह अपने गांव के गुरुद्वारे में रखेंगे जहां आने वाले ग्रामीण यह जान पाएंगे कि आंदोलन में किसान किस तरह से अपना आशियाना खुद बनाकर अपनी मेहनत के बलबूते टिके रहे। 
 
गांव में होगा शानदार स्वागत, बंटेगी मिठाई
फिरोजपुर निवासी डिंपल सिंह ने बताया कि उनके गांव में पहुंचने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। वह जब अपने गांवों में पहुंचेंगे तो वहां पर खूब मिठाई बंटेगी। गांव से बार-बार फोन आ रहे हैं और ग्रामीण पूछ रहे हैं कि वह किस टाइम तक पहुंचेंगे। गांव में सरपंच से लेकर आम ग्रामीणों तक ने स्वागत के इंतजाम किए हैं। अभूतपूर्व स्वागत की तैयारी की जा रही है। मन पूरी तरह गदगद है।

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