कई निजी कॉलेज बिना संबद्धता चल रहे, जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

कई निजी कॉलेज बिना संबद्धता चल रहे, जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

शिमला
हिमाचल प्रदेश में कई निजी कॉलेज बिना संबद्धता (एफिलेशन) चल रहे हैं। निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आयोग ने 20 फरवरी तक सभी निजी कॉलेजों से नए परफार्मा पर संबद्धता से लेकर प्रिंसिपलों की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मांगी है। जानकारियां न देने वाले कॉलेज प्रबंधकों को 25 फरवरी के बाद नोटिस जारी कर तलब किया जाएगा। 

आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अतुल कौशिक ने बताया कि निजी कॉलेजों के प्रिंसिपलों की जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। मामला गंभीर है। आयोग की जांच कमेटी सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि अभी करीब 100 कॉलेजों के दस्तावेज जांचे गए हैं। कुछ कॉलेजों के पास आवश्यक दस्तावेज ही नहीं हैं। ऐसे में सभी कॉलेजों से संबद्धता को लेकर दस्तावेज देने के लिए कहा गया है। 

17 कॉलेजों में प्रिंसिपल ही नहीं
14 निजी कॉलेज कार्यकारी प्रिंसिपलों के हवाले हैं, जबकि 17 में प्रिंसिपल ही नहीं हैं। कई कॉलेजों में प्रिंसिपल निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं। निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की जांच के बाद अब निजी कॉलेजों के प्रिंसिपलों की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच शुरू हुई है। प्रदेश के सभी निजी डिग्री, तकनीकी, बीएड, इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी कॉलेजों के प्रिंसिपलों का ब्योरा मांगा गया है।

आयोग ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी डॉ. एनके शारदा की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया है। कई कॉलेज प्रिंसिपल दस वर्षों तक बतौर प्रोफेसर सेवाएं देने का अनुभव भी नहीं रखते हैं। इसी जांच के दौरान आयोग ने पाया कि कई कॉलेजों ने सिर्फ औपचारिकता के लिए रिकॉर्ड भेजा है। ऐसे में अब सभी कॉलेजों को जानकारी देने के लिए नया परफार्मा जारी किया है। 

विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेना अनिवार्य
निजी कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेना अनिवार्य है। समय-समय पर कॉलेजों के निरीक्षण के बाद इस संबद्धता का नवीनीकरण किया जाता है। कॉलेज में जो विषय पढ़ाए जा रहे हैं, उससे संबंधित विश्वविद्यालय से संबद्धता लेना जरूरी है। कॉलेजों में सीटें बढ़ाने का काम भी संबद्धता देने वाले विश्वविद्यालय का रहता है।

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