ऑफलाइन से वर्चुअल की तरफ बढ़ रहे हैं स्कूल, इंटरेक्टिव एप से पढ़ाई आसान

ऑफलाइन से वर्चुअल की तरफ बढ़ रहे हैं स्कूल, इंटरेक्टिव एप से पढ़ाई आसान

नई दिल्ली
कोरोना संक्रमण ने पढ़ाई के स्वरूप को पूरी तरह से बदल दिया है। बीते साल जूम और गूगल मीट से शुरू हुई कक्षाएं अब वर्चुअल स्कूल की तरफ बढ़ रही हैं। स्कूल अब कक्षाएं लेने या ईवेंट के लिए ब्रेकआउट रूम, फ्लिपग्रिड, एडुपज्जल, लर्नफिल्कस, आईकसेल लर्निंग, पैडलेट, काहूट, नीयर पैड, विजुअल लैब का सहारा ले रहे हैं। पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए समय-समय पर वर्चुअल टूर भी कराए जा रहे हैं। 

स्कूलों का कहना है कि विभिन्न तरह के प्रयोग कर वह बच्चों को कक्षाओं से जोड़ पा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल मार्च 2020 से बंद हैं। ऐसे में तब से पढ़ाई ऑनलाइन ही हो रही है लेकिन बच्चों को फिजिकल स्कूल का अनुभव देने के लिए स्कूल अब वर्चुअल स्कूल की तरफ बढ़ रहे हैं। तकनीक के इस युग में इस तरह से पढ़ाई कराने के पीछे स्कूलों का मकसद बच्चों के पढ़ाई के नुकसान को कम करना है। बीते एक साल में स्कूल व शिक्षक काफी सक्षम हो गए हैं। अब वह स्वयं ही विभिन्न तरह के एप का इस्तेमाल पढ़ाई कराने के लिए कर रहे हैं। 

मौसम विहार स्थित डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल वंदना कपूर कहती हैं कि एक साल में पढ़ाई कराने के तरीके में काफी बदलाव आ गया है। अब हम ऑनलाइन कक्षाओं से वर्चुअल स्कूल की तरफ बढ़ रहे हैं। ब्रेकआउट रूम का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक तरह के वर्चुअल रूम हैं जिसमें बच्चे को शामिल किया जाता है। संगीत व डांस की कक्षाओं के लिए विजुअल इफेक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे बच्चों को बिल्कुल स्कूल जैसा अहसास हो। 

स्कूल की प्राइमरी विंग की इंचार्ज ज्योति बैरी ने बताया कि कई तरह केटूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें केनोवा, क्विजी, व अन्य कई एप शामिल है। इसके अलावा संगीत के शिक्षक तमाम तरह केएप डाउनलोड करवा रहे हैं जिससे कि विजुअल इफेक्ट केसाथ-साथ स्पॉट लाइट भी दी जा सके। वहीं साइंस केप्रोजेक्ट कराने के लिए वर्चुअल व विजुअल लैब का इस्तेमाल हो रहा है। बच्चों को बाहर लेकर नहीं जाया जा सकता इसलिए अभी चिड़ियाघर का वर्चुअल टूर कराया गया। 

वह बताती हैं कि जब ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत हुई थी तब बच्चे इतना रुचि नहीं लेते थे लेकिन अब वह काफी आसानी से कक्षाओं को लेते हैं। वहीं पढ़ाई केनए-नए तरीके खोजने से शिक्षक भी तकनीकी रुप से काफी सक्षम हो गए हैं और उनमें आत्मविश्वास आ गया है। लिटिल फ्लॉवर ग्रुप ऑफ स्कूल के चेयरमैन रोहित दुआ ने बताया कि एक साल केदौरान पढ़ाई को इंटरेक्टिव बनाना काफी जरुरी था। जूम एप तो मीटिंग का माध्यम बना लेकिन काफी नए एप ने पढ़ाई में काफी मदद की है। वह बताते हैं कि उनके शिक्षक कक्षाओं के स्तर व विषय के हिसाब से 15-20 टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

इंटरेक्टिव एप से पढ़ाई हो रही आसान
फ्लिपग्रिड, एडु पज्जल, लर्न फ्लिक्स, आईएक्सेल लर्निंग, नीयर पैड, पैडलैट, काउट जैसे एप से पढ़ाई आसान हो रही है। रोहित दुआ कहते हैं कि पैडलैट के माध्यम से स्टोरी बनाकर पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं जूम पर स्पोट्स सेशन भी आयोजित करते हैं। वहीं स्पोट्स विलेज एप का इस्तेमाल शुरू किया है। इस पर पहले से रिकॉर्डिड चीजें रहती हैं, जो जूम का इस्तेमाल नहीं कर पाते उनके लिए यह कारगर रहता है। 

…लेकिन अभी जरुरी 
स्कूलों का कहना है कि ऑफलाइन पढ़ाई का विकल्प ऑनलाइन नहीं है। लेकिन अभी कोरोना संक्रमण की रफ्तार के कारण ऑनलाइन पढ़ाई ही जरुरी है। इसकेलिए ही तमाम तरह के नए-नए प्रयोग शिक्षण में किए जा रहे हैं। रोहित दुआ कहते हैं कि बीते अगस्त के बाद से तो स्कूलों ने तकनीक का काफी बेहतर इस्तेमाल किया है। जिससे कि बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा जा सके। 

कक्षाएं शुरू होने से पहले होती है योग व वॉर्मअप कक्षाएं
कोरोना संक्रमण केकारण बच्चे कहीं बाहर नहीं निकल पा रहे। बच्चों का चौतरफा विकास स्कूल जाकर ही होता है। ऐसे में स्कूल ऑनलाइन ही उनके इस विकास को बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं। स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं से पहले योग व वॉर्मअप की ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। जिससे कि उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थय भी ठीक रहे। कई स्कूल एरोबिक्स की कक्षाएं भी ले रहे हैं। जिससे बच्चों को यह ना लगे कि वह स्कूल नहीं जा रहे हैं।

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