इलाज के भले इंतजाम नहीं, तैयार हुए कब्रिस्तान और श्मशान

इलाज के भले इंतजाम नहीं, तैयार हुए कब्रिस्तान और श्मशान

हरिद्वार
महाकुंभ के शाही स्नानों में उमड़ी भीड़ के बाद से कोविड-19 का संक्रमण कई गुना बढ़ गया है। कुंभ ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों से लेकर अखाड़ों के संतों और श्रद्धालुओं के संक्रमण की चपेट में आने का सिलसिला जारी है। कोविड पीड़ितों के लिए अस्पतालों में इलाज के भले ही इंतजाम न हों, लेकिन श्मशान और कब्रिस्तान तैयार हो गए हैं। कोरोना संक्रमितों के शवों की अंत्येष्टि की अलग व्यवस्था कर दी गई है। श्मशान घाट पर एक सप्ताह में ही आठ कोरोना संक्रमित लोगों की अंत्येष्टि हो चुकी है।

मकर संक्रांति से 14 अप्रैल के मेष संक्रांति के शाही स्नान तक एक करोड़ से अधिक लोग गंगा स्नान कर लौट चुके हैं। सर्वाधिक 49 लाख श्रद्धालु 12 से 14 अप्रैल के तीन स्नानों पर पहुंचे। इसी दौरान कोरोना का सबसे अधिक प्रसार हुआ है। करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और मेला प्रशासन के अस्थायी अस्पतालों में गंभीर कोविड मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है। जीवन रक्षक दवा रेमडेसिविर इंजेक्शन तक नहीं है।

मरीज एम्स ऋषिकेश और देहरादून रेफर हो रहे हैं। वहीं, श्मशान और कब्रिस्तान में कोविड से दम तोड़ने वालों की अंत्येष्टि की अलग व्यवस्था कर दी गई है। हरिद्वार में तीन श्मशान और तीन से अधिक कब्रिस्तान हैं। इनमें ‘कोरोना मृतक व्यक्ति का दाह संस्कार हेतु निश्चित स्थल’ जैसे बोर्ड भी लग गए हैं। कनखल श्मशान के सेवादार हरिओम के मुताबिक, कोविड शव बढ़ने लगे हैं। पहले कभी कभार एक शव आता था, लेकिन बीते एक हफ्ते में आठ शव आए हैं।

शवों की अंत्येष्टि कोविड प्रोटोकाल से एंबुलेंस में आए लोग ही करते हैं। शव कहां से आए हैं, कोई रिकॉर्ड नहीं है। खड़खड़ी श्मशान घाट के कार्यालय मंत्री रामपाल के मुताबिक, कोविड शव की अंत्येष्टि के लिए अलग से स्थान तय कर दिया है। बीते सप्ताह में कोविड शव नहीं पहुंचा है, लेकिन प्रतिदिन अंत्येष्टि की संख्या बढ़ी है। 97 दाह संस्कार हुए हैं। 

मात्र छह मरे तो आठ शव कहां से आए
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में एक अप्रैल से अब तक छह लोगों की कोविड से मौत हुई है। इनमें दो महिलाएं और चार पुरुष हैं। सभी की उम्र 50 साल से अधिक है, लेकिन कनखल श्मशान घाट पर एक सप्ताह में आठ शवों का कोविड प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार हुआ है।

ज्वालापुर के फातावाली में हरिद्वार का सबसे बड़ा कब्रिस्तान है। कोविड से इंतकाल वाला कोई शव फिलहाल यहां नहीं आया है। लेकिन, एहतियातन कब्रिस्तान में कोविड से मरने वाले लोगों के शवों को सुपुर्द-एक-खाक करने के लिए अलग जगह निर्धारित कर दी गई है। कब्रिस्तान के सेवादारों को भी एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। 
-इमरान, सेवादार, फातावाली कब्रिस्तान

श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमितों के शवों की अंत्येष्टि के लिए अलग जगह निर्धारित है। वहां बोर्ड भी लगा दिया है। एक सप्ताह में कोविड के आठ शव आए हैं। शुक्रवार को तीन, बृहस्पतिवार को दो और बुधवार को एक शव आया था। शवों का दाह संस्कार एंबुलेंस में आने वाले कर्मी और मृतक के परिजन पीपीई किट पहनकर कर रहे हैं। 
-हरिओम, कमेटी सदस्य, श्मशान घाट कनखल 

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