आतंकी घटनाओं के बाद श्रीनगर में बढ़ाई गई सुरक्षा बलों की संख्या, उमर और महबूबा नाराज 

आतंकी घटनाओं के बाद श्रीनगर में बढ़ाई गई सुरक्षा बलों की संख्या, उमर और महबूबा नाराज 

जम्मू

घाटी में हाल में हुए आतंकी हमलों के चलते सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। सीआरपीएफ की अतिरिक्त टुकड़ियों को उत्तरी एवं दक्षिणी कश्मीर से बुलाया गया है। इन्हें श्रीनगर के विभिन्न सामुदायिक के केंद्रों और शादी घरों में ठहराया गया है। सीआरपीएफ  के जनसंपर्क अधिकारी अभिराम पंकज ने कहा कि शहर में जरूरत के चलते अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इन्हें ठहराने के लिए स्थानों का चयन नागरिक प्रशासन द्वारा किया गया है। प्रशासन के कहने पर उनकी तैनाती की जाती है। वह उन्हें अपनी पसंद के स्थान पर ठहराते हैं। इस बीच सीआरपीएफ की सामुदायिक भवनों में तैनाती ने विवाद खड़ा कर दिया है। नेकां व पीडीपी ने इसकी कड़ी आलोचना की है।  

उमर बोले, शादी घरों को बैरकों के रूप से किया जा रहा इस्तेमाल
नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति इस हद तक खराब हो गई है कि पूर्ववर्ती राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान बनाए गए सामुदायिक घरों व शादी घरों का इस्तेमाल सुरक्षाबलों की बैरक के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने ट्वीट किया कि मेरी सरकार ने श्रीनगर में सामुदायिक व विवाह घर बनाए थे और बंकरों को खत्म कर दिया था। शहर में यह देखना निराशाजनक है कि नए बंकर बनाए जा रहे हैं और विवाह घरों का इस्तेमाल सुरक्षाबलों की बैरक के रूप में किया जा रहा है। उनकी यह टिप्पणी यहां कुछ सामुदायिक एवं विवाह घरों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती की खबरों के बाद आई।

लोगों को चुप कराने के लिए रोज कठोर कानून लाए जाते हैं: महबूबा 
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि लोगों को चुप कराने के उद्देश्य से हर रोज कठोर कानून लाए जाते हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि श्रीनगर में हर जगह सुरक्षा बंकर स्थापित किए जाने के बाद अब सीआरपीएफ  कर्मियों को विवाह घरों में भी तैनात कर दिया गया है। यह लोगों के लिए पूरी तरह निजी स्थान हैं।
 
मेयर ने मंडलायुक्त के समक्ष उठाया मामला
श्रीनगर के महापौर जुनैद अजीम मट्टू ने मुद्दे को मंडल प्रशासन के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर श्रीनगर नगर निगम से चर्चा नहीं की गई। ट्वीट किया कि कश्मीर के मंडलायुक्त ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इसके लिए अन्य विकल्पों की तलाश की जाएगी। कहा कि सामुदायिक हाल का निर्माण सामाजिक व सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए किया गया है। यह वैसे इलाकों में बनाया गया है जहां बड़े मकान और लॉन नहीं हैं। इसलिए यह सामाजिक जरूरत है। इसके निर्माण व रखरखाव पर भारी भरकम राशि खर्च की गई है। श्रीनगर में सीआरपीएफ कर्मियों को अच्छी आवासीय सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन सामुदायिक केंद्रों को समुदाय की जरूरतों के लिए छोड़ देना चाहिए। इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए और इससे छेड़छाड़ भी नहीं की जानी चाहिए। 

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