अरुणाचल प्रदेश में शहीद हुए जवानों के शव पहुंचे पठानकोट एयरबेस, अंतिम दर्शनों के लिए जमा हुए लोग

अरुणाचल प्रदेश में शहीद हुए जवानों के शव पहुंचे पठानकोट एयरबेस,  अंतिम दर्शनों के लिए जमा हुए लोग

पठानकोट (पंजाब)
अपने लाडले की पार्थिव देह के इंतजार में शहीद अक्षय पठानिया के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके गांव चक्कड़ में मातम पसरा है। गांव का हर नागरिक गांव के पहले शहीद की देह के इंतजार में है।

अरुणाचल प्रदेश में शहादत का जाम पीने वाले सभी सात शहीदों की पार्थिव देह शनिवार को पठानकोट एयरबेस पहुंचीं। इसके बाद सैन्य वाहनों में एक शव पठानकोट के गांव चक्कड़ निवासी अक्षय पठानिया, तीन जम्मू-कश्मीर, दो हिमाचल और एक पार्थिव देह को बटाला भेजा गया।

अपने लाडले की पार्थिव देह के इंतजार में शहीद के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव चक्कड़ में मातम पसरा है। गांव का हर नागरिक गांव के पहले शहीद की देह के इंतजार में है। पूरे गांव के लाडले अक्षय पठानिया की शहादत के कारण गमगीन माहौल में पूरे गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। वह अपने बड़े भाई सिपाही अमित पठानिया जोकि सेना की 14 जैक राइफल यूनिट तिब्बड़ी में तैनात हैं एवं बहन रवीना पठानिया में सबसे छोटा होने के साथ-साथ सबके प्रिय थे।
परिवार का इकलौता बेटा था गुरबाज
शहीदों में बटाला के गांव मसानिया के 62 मीडियम रेजीमेंट में तैनात गुरबाज सिंह भी शामिल हैं। 22 वर्षीय गुरबाज के चाचा गुरदीप सिंह ने बताया कि गुरबाज सिंह परिवार का इकलौता बेटा था। गुरबाज के पिता गुरमीत सिंह भी सेना से रिटायर हुए थे जिसकी वजह से गुरबाज सिंह भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था।

अपने इसी जज्बे के कारण वह 18 अक्तूबर 2018 को सेना में भर्ती हुआ था। इस समय वह अरुणाचल प्रदेश के कामेंग सेक्टर में तैनात था। नेटवर्क की वजह से परिवार से सप्ताह में एक बार ही बात होती थी। एक फरवरी को उसका अंतिम बार फोन आया था। शहीद होने की खबर परिवार को गुरुवार को पता चली है। गुरबाज के घर पर उनके पिता गुरमीत सिंह, मां हरजीत कौर और बड़ी बहन जसपिंदर कौर हैं।

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