अनिल को मंत्रिमंडल में शामिल न करने पर मायूसी

मंडी। वीरभद्र सिंह के मंत्रिमंडल में पहले दौर में सदर के विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा को जगह न मिलने पर मंडी में मायूसी का माहौल है। सदर के विधायक अनिल शर्मा को मंत्रिमंडल में लिए जाने की प्रबल संभावना थी, क्योंकि अनिल शर्मा 1993 में भी वीरभद्र के मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके हैं। एक बार राज्य सभा के सदस्य भी रहे हैं, मगर पहले दौर में अनिल शर्मा को मंत्रिमंडल में न लिए जाने पर उनके समर्थकों के अलावा मंडी वासियों को भी हैरानी हुई है। हालांकि, पं. सुखराम पहले से ही अपने बेटे को मंत्री बनाने की कवायद में जुटे थे। प्रदेश में कांग्रेस की जीत का श्रेय भी वीरभद्र सिंह को देने में भी उन्होंने कोई कंजूसी नहीं दिखाई, मगर वीरभद्र मंत्रिमंडल में अनिल शर्मा को जगह न मिलने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। अनिल शर्मा 1993 में वीरभद्र सिंह के मंत्रिमंडल में खेल राज्य मंत्री रह चुके हैं। 1998 से 2004 तक वह राज्य सभा सांसद भी रहे हैं। इस बार माना रहा जा रहा था कि पहले ही दौर में अनिल शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। सदर विधान सभा क्षेत्र मंडी जिला का मुख्यालय होने के चलते 1993 और 1998 के बाद सदर को मंत्री पद नहीं मिला है। हालांकि, सदर से संसदीय चुनाव के दौरान प्रतिभा सिंह और वीरभद्र सिंह को बढ़त मिली है। अब वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बन गए हैं तो उन्हें मंडी संसदीय क्षेत्र के सांसद पद से इस्तीफा देना होगा। छह माह बाद लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसमें प्रतिभा सिंह कांग्रेस की संभावित उम्मीदवार हो सकती हैं। इधर, पं. सुखराम अपने बेटे की लॉबिंग के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं।
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मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की उम्मीद थी, मगर ऐसा न होने पर मुझे और मेरे समर्थकों को निराशा हुई है। नहीं मालूम मुझे मंत्रिमंडल में क्यों नहीं शामिल किया गया, जबकि रानी प्रतिभा सिंह और राजा वीरभद्र सिंह के चुनाव में जी जान से मेहनत कर उन्हें सदर से बढ़त दिलवाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। -अनिल शर्मा, विधायक सदर।

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