अधिकारियों ने उद्योगपतियों के साथ की चर्चा, बैठक में नहीं आए किसान

अधिकारियों ने उद्योगपतियों के साथ की चर्चा, बैठक में नहीं आए किसान

सोनीपत (हरियाणा)
सोनीपत में हरियाणा सरकार की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय में रविवार को हरियाणा सरकार की उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें हरियाणा सरकार के एसीएस राजीव अरोड़ा व हरियाणा डीजीपी पीके अग्रवाल ने कुंडली बॉर्डर पर रास्ता खुलवाने के लिए उद्योगपतियों के साथ गहन मंथन किया। बैठक में उद्योगपतियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर कुंडली बॉर्डर से एक तरफ का रास्ता खुलवाने के लिए हरियाणा सरकार की उच्च स्तरीय बैठक रविवार को किसान नेताओं के साथ होनी थी, लेकिन किसान नेताओं ने बैठक से एक दिन पहले ही आने से मना कर दिया था। 

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किसान नेताओं ने कह दिया था कि जब उन्होंने रास्ता बंद किया ही नहीं तो वे पार्टी क्यों बने। इसके बाद सोनीपत के उद्योगपतियों के साथ बैठक तय की गई। रविवार को हुई बैठक में उद्योगपतियों ने कहा कि कुंडली क्षेत्र में करीब पांच हजार उद्योग हैं, जिनमें करीब साढ़ चार लाख मजदूर काम करते हैं। रास्ता बंद होने के कारण उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। बैठक में रास्ता खुलवाने व अन्य मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। 

बैठक में हरियाणा सरकार के आला अधिकारियों के साथ रोहतक रेंज आईजी एडीजीपी संदीप खिरवार, सोनीपत डीसी ललित सिवाच, सोनीपत पुलिस अधीक्षक जश्नदीप सिंह रंधावा, झज्जर के डीसी श्याम लाल पुनिया, झज्जर के पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल व रोहतक रेंज के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। 

किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा था कि  सुप्रीम कोर्ट के आदेश में किसान पार्टी नहीं हैं। जवाब सरकार से मांगा गया है तो सरकार ही जवाब दे। सरकार अपनी चाल में फंसाना चाहती है लेकिन किसान हर षड्यंत्र को समझते हैं। सरकार ने रास्ता बंद किया है तो वही खोले। किसान नेताओं ने कहा कि कोरोना काल के समय जब ऑक्सीजन सिलिंडर लाने-ले जाने में लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा था तो सरकार को कहा था कि दिल्ली की तरफ बनाई दीवार को मार्ग से हटाए लेकिन सरकार नहीं मानी। अब सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है तो सरकार किसानों के कंधे पर रखकर बंदूक चलाना चाहती है। किसान नेता मंजीत राय ने बताया कि तीन कृषि कानूनों की वापसी समेत अन्य मांगें पूरी होने के बाद ही कुंडली बॉर्डर से हटेंगे।

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